सीजी भास्कर, 24 मई : राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण (Fertilizer Distribution 2026) संबंधी नवीन दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। वैज्ञानिकों द्वारा सतत कृषि विकास हेतु अनुशंसित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद एवं नील-हरित काई जैसे वैकल्पिक उपायों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
नई व्यवस्था का उद्देश्य
लागत में कमी और भूमि संरक्षण शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों तथा खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के मद्देनजर राज्य के सभी किसानों को समय पर और समानुपातिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करना और खेती की लागत कम करना, भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित रखना, उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग (कालाबाजारी/औद्योगिक दुरुपयोग) पर प्रभावी रोक लगाना तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अनुरूप केवल उच्च गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
यूरिया और डीएपी वितरण का नया पैमाना
विगत वर्ष खरीफ 2025 में किसानों को वितरित की गई मात्रा के आधार पर इस वर्ष का कोटा (Fertilizer Distribution 2026) तय किया गया है। यूरिया वितरण में खरीफ 2025 में मिले यूरिया की 80 प्रतिशत मात्रा ही पारंपरिक यूरिया के रूप में दी जाएगी। शेष 20 प्रतिशत मात्रा उपलब्धता के आधार पर दी जाएगी, अन्यथा उसके बदले नैनो यूरिया प्रदाय किया जाएगा।
डीएपी वितरण में भी पिछले वर्ष वितरित डीएपी की केवल 60 प्रतिशत मात्रा ही इस बार दी जाएगी। शेष 40 प्रतिशत मात्रा के लिए वैकल्पिक एनपीके उर्वरक अथवा नैनो डीएपी उपलब्ध कराया जाएगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए विवश नहीं किया जाएगा और यह व्यवस्था पूरी तरह वैकल्पिक होगी।
जोत के आधार पर किश्तों में मिलेगा यूरिया
किसानों की श्रेणी और भूमि धारिता के अनुसार वितरण की व्यवस्था तय की गई है। सीमांत कृषकों को, जिनकी भूमि 2.5 एकड़ तक है, निर्धारित मात्रा में उर्वरक एकमुश्त उपलब्ध कराया जाएगा। 2.5 से 5 एकड़ तक भूमि वाले लघु किसानों को यूरिया दो किश्तों में मिलेगा, जिसमें दूसरी किश्त पहली किश्त के 20 दिन बाद दी जाएगी। वहीं 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े किसानों को यूरिया तीन किश्तों में उपलब्ध कराया जाएगा और प्रत्येक किश्त के बीच 20 दिनों का अंतराल अनिवार्य होगा।
बोरी की गणना का नियम
उर्वरक की गणना बोरियों की संख्या के आधार पर होगी। यदि गणना में दशमलव संख्या आती है तो निकटतम पूर्णांक मान्य होगा। उदाहरण के लिए 7.2 बोरी होने पर 7 बोरी तथा 7.8 बोरी होने पर 8 बोरी उपलब्ध कराई जाएगी।
पारदर्शी और समयबद्ध वितरण के निर्देश
राज्य शासन ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों और सहकारी संस्थाओं को कड़े निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों का वितरण पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। इस व्यवस्था से खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समितियों में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा और प्रदेश के कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।



