सीजी भास्कर, 25 मई : बिलासपुर हाईकोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों (Maternity Leave Case) को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है और बाद में वह दोबारा गर्भवती होती है तो पहले लिया गया अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश में बाधा नहीं बनेगा। महिला कर्मचारी दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए कानूनन पूरी मातृत्व छुट्टी पाने की हकदार होगी। मामले में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया।
जुड़वां बच्चों की प्रेग्नेंसी के दौरान हुआ मिसकैरेज
जानकारी के अनुसार भारतीय खाद्य निगम रायपुर में असिस्टेंट ग्रेड 2 के पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी वर्ष 2019 में गर्भवती हुई थीं। महिला जुड़वां बच्चों की मां बनने वाली थीं लेकिन गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के चलते 25 अप्रैल 2019 को एक भ्रूण का मिसकैरेज हो गया। इसके बाद डॉक्टरों की निगरानी और लंबे बेड रेस्ट के बाद महिला ने 3 सितंबर 2019 को एक प्री मैच्योर बच्ची को जन्म दिया।
विभाग ने काट लिए थे वेतन के 80 हजार रुपए
महिला कर्मचारी (Maternity Leave Case) ने मातृत्व अवकाश और मेडिकल बिल भुगतान के लिए विभाग में आवेदन किया था। हालांकि विभाग ने उन्हें केवल 68 दिनों का असाधारण अवकाश बिना वेतन के मंजूर किया। इतना ही नहीं लीव बैलेंस नहीं होने का हवाला देकर महिला के वेतन से 80 हजार 254 रुपए की कटौती भी कर ली गई। विभाग के इस फैसले के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा 90 दिनों की छुट्टी का पूरा अधिकार
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट (Maternity Leave Case) ने कहा कि महिला कर्मचारी गर्भपात और मातृत्व लाभ नियमों के तहत कुल 90 दिनों की छुट्टी पाने की हकदार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभाग छुट्टी की अवधि को कम नहीं कर सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला के वेतन से काटे गए 80 हजार 254 रुपए की रिकवरी को रद्द करते हुए पूरी राशि वापस लौटाने के आदेश दिए।
मेडिकल बिलों पर भी दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी के लंबित 3 लाख 76 हजार 773 रुपए के मेडिकल बिलों पर भी अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विभाग को सभी दस्तावेजों की दोबारा जांच कर उचित आदेश जारी करने को कहा है।



