सीजी भास्कर, 26 मई : राज्य सरकार अब बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे गांवों में बच्चों और माताओं के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने बस्तर संभाग के भवनविहीन 506 आंगनबाड़ी केन्द्रों (Child Development Scheme) के लिए पक्के भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश जारी किए हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित जिलों में अब कोई भी आंगनबाड़ी भवनविहीन (Child Development Scheme) न रहे और बच्चों को सुरक्षित, सुविधायुक्त और सीखने के अनुकूल वातावरण मिल सके। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं।
बस्तर के दूरस्थ गांवों में बदलेगी तस्वीर
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा Bastar, Bijapur, Dantewada, Kanker, Narayanpur और Sukma जिलों में संचालित भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव स्तर पर आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस संबंध में संबंधित जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं।
बच्चों के सीखने के लिए “सीखता भवन” मॉडल
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार केवल भवन निर्माण नहीं करा रही, बल्कि ऐसे आंगनबाड़ी केन्द्र विकसित करना चाहती है जो बच्चों के मानसिक विकास और सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करें। इसी उद्देश्य से भवन निर्माण में “बाला” कॉन्सेप्ट यानी बिल्डिंग एज लर्निंग एड को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मॉडल के तहत भवन की दीवारें, रंग, आकृतियां और संरचना बच्चों के लिए सीखने का माध्यम बनेंगी, जिससे आंगनबाड़ी केन्द्र आकर्षक और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल वातावरण तैयार कर सकें।
11.69 लाख प्रति भवन होगा खर्च
प्रत्येक आंगनबाड़ी (Child Development Scheme) भवन निर्माण के लिए 11 लाख 69 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2 लाख रुपए, महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपए और शेष 1.69 लाख रुपए की राशि डीएमएफ, सीएसआर तथा अन्य स्थानीय संसाधनों से उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मांग आधारित प्रक्रिया के तहत भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्राथमिकता से स्वीकृति दी जाए और मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा कराया जाए। उन्होंने साफ कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार ने बस्तर संभाग के 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पक्के भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। महिला एवं बाल विकास विभाग और मनरेगा के अभिसरण से यह निर्माण कार्य किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी भवनों का निर्माण पूरा कर बच्चों और माताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।



