सीजी भास्कर, 26 मई। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टर्स ने ट्रकों को खड़ा करना शुरू कर दिया है। हालात ये है कि देशभर में मौजूद 95 लाख ट्रकों में से करीब 20% यानी 19 लाख ट्रक सड़कों से हट गए हैं। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। (Diesel price hike impacts truck operations)
रिपोर्ट के मुताबिक, डीजल की कमी और ऊंचे दामों की वजह से ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने मालभाड़ा भी बढ़ा दिया है। पश्चिम से उत्तर भारत जैसे मुख्य रूट्स पर भाड़े में 10 से 15% की बढ़ोतरी हुई है।
30km तक की लोकल ढुलाई के दाम तो और भी ज्यादा बढ़े हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि आने वाले दिनों में फल, सब्जी और राशन के दाम बढ़ सकते हैं।
11 दिन में ₹8 तक बढ़े दाम, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें : Diesel price hike impacts truck operations
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम 4 बार बढ़ाए हैं, जिससे कुल बढ़त ₹7.5 से ₹8 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। नेशनल हाईवे के पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
छोटे ऑपरेटर्स की मुसीबत बढ़ी
भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 70% से ज्यादा छोटे ट्रक ऑपरेटर्स हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट हरीश सभरवाल के मुताबिक, ट्रक चलाने के कुल खर्च में 40-45% हिस्सा अकेले डीजल का होता है। तेल की कीमतों में किस्तों में हुई बढ़ोतरी का बोझ अब छोटे ऑपरेटर्स उठाने की स्थिति में नहीं हैं। कई पंपों ने उधार पर तेल देना बंद कर दिया है, जिससे वर्किंग कैपिटल का संकट खड़ा हो गया है।
इंडस्ट्रियल डीजल पंपों महंगा होने से पंपों पर बढ़ी भीड़ : Diesel price hike impacts truck operations
बाजार में डीजल की दो तरह की कीमतें हैं- बल्क (थोक) और रिटेल। थोक में मिलने वाला डीजल रिटेल के मुकाबले ₹40-42 प्रति लीटर महंगा हो गया है, हाल ही में सरकार ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत 22 रुपए बढ़ाई थी।
ऐसे में जो बड़े संस्थान पहले थोक में तेल खरीदते थे, वे अब आम जनता वाले पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा रहे हैं। इसी वजह से रिटेल आउटलेट्स पर सप्लाई कम पड़ रही है और ट्रकों को 6 से 8 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
तेल कंपनियों ने कहा- किल्लत केवल स्थानीय : Diesel price hike impacts truck operations
इंडियन ऑयल (IOC) जैसी सरकारी कंपनियों ने देशभर में तेल की कमी की बात से इनकार किया है। कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल की बिक्री 14% और डीजल की 18% बढ़ी है। उनके मुताबिक, किल्लत सिर्फ कुछ चुनिंदा इलाकों में है और यह अस्थायी है। मानसून शुरू होने के साथ ही खेती और पर्यटन की मांग कम होगी, जिससे स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।




