सीजी भास्कर, 27 मई : छत्तीसगढ़ में नौतपा और भीषण गर्मी का सितम इस कदर हावी है कि अब इंसानों के साथ-साथ बेजुबान वन्य जीव (Bear Searching Water in Balod) भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने लगे हैं। जंगलों के भीतर प्राकृतिक जलस्रोत और नदी-नाले पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण जंगली जानवर अपनी जान बचाने के लिए मजबूरन आबादी वाले इलाकों और गांवों का रुख कर रहे हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार की शाम बालोद वन परिक्षेत्र के बरही सर्किल से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां एक भालू अपनी प्यास बुझाने के लिए जंगल छोड़कर गांव के समीप स्थित एक बांध तक पहुंच गया।
यह पूरा नजारा बालोद वन परिक्षेत्र के बरही सर्किल अंतर्गत ग्राम नर्रा के पहले घाट के नीचे स्थित जामकोन्हा बांध का है। शाम के वक्त जब कुछ ग्रामीण बांध की तरफ गए, तो उन्होंने देखा कि एक विशालकाय भालू पानी की तलाश में वहां (Bear Searching Water in Balod) भटक रहा था। भालू ने काफी देर तक बांध के किनारे ठहरकर अपनी प्यास बुझाई। इस दौरान कुछ ग्रामीणों ने दूर से ही इस पूरे वाकये को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। पानी पीने के बाद भालू बिना किसी को नुकसान पहुंचाए चुपचाप वापस जंगल की ओर लौट गया, लेकिन इस घटना ने जंगलों के भीतर पानी के गंभीर संकट की पोल खोलकर रख दी है।
45 डिग्री के टॉर्चर से सूख गए जंगलों के कंठ
इन दिनों बालोद जिले सहित पूरे संभाग में सूरज आग उगल रहा है और तापमान लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। इस भीषण गर्मी के चलते जंगलों के भीतर स्थित छोटे-छोटे तालाब, प्राकृतिक झरने और नाले पूरी तरह सूखकर मैदान में तब्दील हो चुके हैं। जंगलों में पानी का नामोनिशान न होने के कारण वन्य जीवों की परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से जंगल से लगे मैदानी और रिहायशी क्षेत्रों में भालू, हिरण और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पानी की तलाश में भटकते (Bear Searching Water in Balod) हुए ये जानवर अक्सर शाम या रात के वक्त गांवों के आसपास देखे जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों में एक अजीब सी दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों को डर है कि पानी की यह तलाश कहीं किसी बड़ी हिंसक भिड़ंत में न बदल जाए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का साफ मानना है कि यदि आने वाले दिनों में गर्मी का पारा इसी तरह चढ़ता रहा और जंगलों के भीतर पानी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वन्य जीवों का गांवों की ओर आना और ज्यादा बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच सीधे टकराव (मानव-वन्यजीव संघर्ष) का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, जो दोनों के लिए ही जानलेवा साबित हो सकता है।
भालू के बांध तक पहुंचने की इस घटना के बाद वन विभाग की टीम भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। वन अधिकारियों ने आस-पास के सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे शाम या रात के समय अकेले जंगल की तरफ न जाएं। विभाग ने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि यदि गांव के आसपास कोई भी जंगली जानवर पानी की तलाश में (Bear Searching Water in Balod) दिखाई देता है, तो उसे बिल्कुल भी न छेड़ें, न ही उसके पास जाकर सेल्फी या वीडियो बनाने की कोशिश करें। किसी भी वन्य प्राणी की हलचल दिखने पर तुरंत वन अमले को सूचित करें। हालांकि विभाग का दावा है कि जंगलों में कृत्रिम जलपात्रों के जरिए पानी भरने का काम किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर ये कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं।




