सीजी भास्कर, 28 मई : क्या आपने कभी सोचा है कि नक्सल प्रभावित और सुदूर वनांचल माने जाने वाले बीजापुर के गांवों में जब पानी (Madded Tank Rejuvenation Project) की एक-एक बूंद के लिए फसलें दम तोड़ देती हैं, तहाँ वहां के अन्नदाता पर क्या गुजरती होगी? बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड में सालों से सिंचाई की किल्लत से जूझ रहे किसानों की किस्मत अब करवट बदलने जा रही है। जल संसाधन विभाग ने एक ऐसी बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतार दिया है, जिसने बंजर हो रही उम्मीदों को दोबारा जिंदा कर दिया है। मद्देड़ तालाब के कायाकल्प की यह गूंज अब सीधे उन गरीब और जरूरतमंद किसानों के घरों तक पहुंच रही है, जो सिर्फ और सिर्फ मानसून के भरोसे खेती करने को मजबूर थे। यह महज एक तालाब का सुदृढ़ीकरण नहीं है, बल्कि यह बीजापुर के ग्रामीण अंचल की तस्वीर और तकदीर को पूरी तरह से बदलने का एक बहुत बड़ा आर्थिक और सामाजिक अभियान बन चुका है।
शुरुआत में जहाँ इस सुदूर इलाके में बुनियादी ढांचा खड़ा करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, तहां सरकार और प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इस काम को रुकने नहीं दिया। लगभग 370.55 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से स्वीकृत इस जीवनदायिनी परियोजना पर काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। 23 दिसंबर 2024 को जिस काम की नींव रखी गई थी, उसने अब रफ्तार पकड़ ली है और वर्तमान में 71 प्रतिशत कार्य पूरी तरह से मुकम्मल किया जा चुका है। जैसे ही यह काम पूरी तरह खत्म होगा, तहाँ सिंचाई के मोर्चे पर एक अभूतपूर्व क्रांति देखने को मिलेगी। इस महत्वपूर्ण माडल (Madded Tank Rejuvenation Project) के पूरा होते ही पूरे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था इतनी मजबूत हो जाएगी कि किसानों को पानी की कमी के कारण अपनी खड़ी फसल को बर्बाद होते नहीं देखना पड़ेगा।
चार गांवों के 299 किसानों का बदलेगा भाग्य
इस बड़ी योजना का सबसे खूबसूरत और मानवीय पहलू यह है कि इसका सीधा फायदा समाज के आखिरी छोर पर बैठे उन छोटे और सीमांत किसानों को मिलने जा रहा है, जो अब तक पारंपरिक और बेहद सीमित संसाधनों में जी रहे थे। इस जलाशय के पुनर्जीवन से ग्राम तमलापल्ली, मद्देड़, संगमपल्ली और बारेगुड़ा के करीब 299 किसान परिवारों की जिंदगी में सीधा और सकारात्मक बदलाव आएगा। यहाँ इन चार गांवों की लगभग 530 हेक्टेयर यानी एक बहुत बड़े कृषि रकबे को बारहमासी सिंचाई की पक्की सुविधा मिल सकेगी।
जरा सोचिए, जहां पहले सिंचाई के अभाव में किसान सिर्फ एक ही फसल ले पाते थे और बाकी के महीने मजदूरी के लिए भटकते थे, तहाँ अब उनके खेतों को समय पर पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इस बेहतरीन माडल (Madded Tank Rejuvenation Project) के जरिए जब खेतों की मिट्टी को सही समय पर पानी की खुराक मिलेगी, तहाँ फसलों की उत्पादकता कई गुना बढ़ जाएगी। खेतों की इस हरियाली से न केवल इन 299 किसानों के घरों में समृद्धि आएगी, बल्कि पूरे बीजापुर जिले के कृषि परिदृश्य में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ जाएगा।
सिंचाई के साथ-साथ भूजल स्तर सुधरेगा
यह परियोजना केवल खेतों में पानी पहुंचाने की एक पाइपलाइन या नहर मात्र नहीं है, बल्कि यह इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में जल संरक्षण और जल संवर्धन का एक बेहद मजबूत और टिकाऊ जरिया बनने जा रही है। गर्मियों के दिनों में जहाँ भोपालपटनम के इन इलाकों में कुएं और हैंडपंप पूरी तरह सूख जाते हैं, तहाँ इस विशाल तालाब के पुनर्जीवन से आसपास का वाटर लेवल (भूजल स्तर) तेजी से ऊपर आएगा। तालाब में साल भर पानी जमा रहने से ग्रामीण जनजीवन को एक बहुत बड़ा सहारा मिलेगा।
इसके साथ ही, ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी मूलभूत जरूरतें, जैसे निस्तारी, मवेशियों के लिए पीने का पानी और घरेलू काम-काज के लिए पानी की उपलब्धता हर मौसम में सुनिश्चित हो सकेगी। पर्यावरण और ग्रामीण जीवन को सहेजने वाले इस अनूठे माडल (Madded Tank Rejuvenation Project) की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह प्रकृति और इंसान दोनों की जरूरतों को एक साथ पूरा करता है। पानी की यह स्थाई उपलब्धता इस पूरे इलाके को पानी के संकट से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति दिला देगी।
धान के साथ सब्जियां भी उगेंगी
मद्देड़ तालाब के इस बदलते स्वरूप को देखकर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के भीतर एक नया जोश और गजब का उत्साह साफ देखा जा सकता है। गांव के चौपालों पर अब सिर्फ इसी बात की चर्चा होती है कि जब नहरों से पानी खेतों तक पहुंचेगा, तहां वे सिर्फ धान की पारंपरिक खेती तक ही सीमित नहीं रहेंगे। पानी की पक्की गारंटी मिलने के बाद अब यहां के किसान फसल विविधीकरण (क्रॉप डायवर्सिफिकेशन) की ओर कदम बढ़ाने की बड़ी योजना बना रहे हैं।
अब वे रबी के सीजन में दलहन, तिलहन और मुनाफे वाली हरी सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर कर सकेंगे। यहां इस आधुनिक माडल (Madded Tank Rejuvenation Project) ने किसानों को बेहतर कृषि प्रबंधन सीखने और अपनी आय को दोगुना करने का एक सुनहरा अवसर दे दिया है। ग्रामीणों का साफ मानना है कि तालाब के इस जीर्णोद्धार से आने वाले समय में न केवल खेतों की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के स्तर में भी बड़ा सुधार आएगा क्योंकि अब उनके हाथ में सीधे कमाई का पैसा आएगा।
मजबूत होगी ग्रामीण इकोनॉमी
जल संसाधन विभाग की यह आक्रामक और दूरदर्शी पहल वास्तव में छत्तीसगढ़ के वनांचलों में ग्रामीण विकास की एक नई और बेहद मजबूत नींव रख रही है। मद्देड़ तालाब का यह जीर्णोद्धार केवल एक सिविल कंस्ट्रक्शन का काम नहीं है, बल्कि यह बीजापुर के दूरस्थ अंचलों में आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक बड़ा और असरदार जरिया साबित होने वाला है। जब किसानों के पास अपने ही गांव में साल भर खेती करने का साधन होगा, तहाँ रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर होने वाला पलायन पूरी तरह से थम जाएगा।
आज यह परियोजना किसानों की माली हालत को सुधारने के साथ-साथ क्षेत्र के पूरे आर्थिक ढांचे को एक नई गति दे रही है। इस जनकल्याणकारी माडल (Madded Tank Rejuvenation Project) ने यह पूरी तरह से साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में, पूरी गंभीरता और आक्रामकता के साथ बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, तहाँ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और किसानों को मुख्यधारा से जोड़कर एक बेहद समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है। भोपालपटनम की धरती से शुरू हुआ सादगी और विकास का यह सफर आने वाले दिनों में पूरे बस्तर संभाग के लिए विकास का एक बेहतरीन रोल माडल बनने जा रहा है।




