सीजी भास्कर, 29 मई : आसमान से बरसती आग और रूह कपा देने वाली लू ने इंसानों का जीना तो मुहाल किया ही है, लेकिन अब छत्तीसगढ़ (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) के जंगलों से एक ऐसा खौफनाक सस्पेंस सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। खैरागढ़ वन क्षेत्र के उपवृत्त लछना अंतर्गत दल्लीखोली के वन कक्ष क्रमांक 322 में अचानक एक साथ 15 बेजुबान वन्यजीवों और पक्षियों के शव मिलने से हड़कंप मच गया है।
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हरे-भरे जंगलों के बीच बिछी इन लाशों ने इस भीषण गर्मी में बेजुबान वन्यप्राणियों के अस्तित्व पर एक गहरा खैरागढ़ वाइल्डलाइफ हीटवेव क्राइसिस (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) खड़ा कर दिया है। जैसे ही ग्रामीणों ने इन बेजुबान परिंदों और जानवरों को तड़पते और मृत अवस्था में देखा, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और डॉक्टरों का दस्ता आनंद-फानन में मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह सिर्फ कुछ जीवों की मौत का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का वो गंभीर इशारा है जो बता रहा है कि हमारे जंगल अब सुलग रहे हैं और वहां रहने वाले बेजुबान पानी की एक-एक बूंद के लिए तड़प-तड़प कर अपनी जान दे रहे हैं।
शिकार, साजिश या फिर आसमान से बरसी मौत
शुरुआती तौर पर इस घटना को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं, जिसने वन अमले की रातों की नींद उड़ा दी थी। क्या यह शिकारियों की कोई नई साजिश थी या फिर पानी में जहर मिलाया गया था? इन तमाम सवालों के बीच वन विभाग और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने जब घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, तो प्राथमिक जांच में सबसे बड़ा कारण भीषण गर्मी और जानलेवा हीट वेव (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) को माना गया है।
पिछले कई दिनों से पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जिससे जंगलों के पारंपरिक जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। हालांकि, वन विभाग किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता, इसलिए मौत के इस सस्पेंस से पूरी तरह पर्दा उठाने के लिए घटना स्थल के आसपास की मिट्टी और जल स्रोतों के नमूने लेकर तत्काल प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही असली सच सामने आ पाएगा, लेकिन इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ में पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है।
सूखी नदियों के बीच बेजुबानों को बचाने की जंग
इस दर्दनाक हादसे के बाद नींद से जागे वन विभाग ने अब वन्यजीवों की प्यास बुझाने और उन्हें मौत के मुंह से निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। जंगलों के भीतर पानी की भारी किल्लत को दूर करने के लिए विभाग ने आनन-फानन में 3 अस्थायी वाटर होल (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) तैयार किए हैं।
इन कृत्रिम तालाबों में टैंकरों के जरिए रोजाना नियमित रूप से पीने के साफ पानी की सप्लाई की जा रही है, ताकि प्यास से बेहाल होकर कोई और वन्यजीव दम न तोड़े। वन अधिकारियों का कहना है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अन्य संवेदनशील और सूखे इलाकों की पहचान की जा रही है, जहां जरूरत के मुताबिक नए वाटर होल बनाकर पानी पहुंचाया जा सके। यह वक्त जंगलों में छिपे उन बेजुबानों को सहारा देने का है, जो बोलकर अपनी तकलीफ बयां नहीं कर सकते।
चौबीसों घंटे रखी जा रही पैनी नजर
नक्सल प्रभावित और घने जंगलों वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में सरकार नहीं है। बेजुबानों की सुरक्षा और उनकी पल-पल की हलचल को रिकॉर्ड करने के लिए वन विभाग ने पूरे इलाके में आधुनिक ट्रैप कैमरों (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) का एक बड़ा जाल बिछा दिया है।
इन कैमरों के जरिए पानी के स्रोतों पर आने वाले जानवरों की सेहत और उनकी गतिविधियों पर सीधे कंट्रोल रूम से पैनी नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही, भीषण गर्मी और लू के इस दौर में वन रक्षकों की विशेष टीमों को मैदान में उतारा गया है जो तपती धूप में भी नियमित गश्त (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति या किसी अन्य जानवर के बीमार होने पर उसे तुरंत मेडिकल सहायता दी जा सके और समय रहते उसकी जान बचाई जा सके।
वन मंत्री के कड़े निर्देश, ग्रामीणों से की गई भावुक अपील
इस दर्दनाक घटना की गूंज राजधानी रायपुर तक पहुंच चुकी है। वन मंडलाधिकारी श्री पंकज सिंह राजपूत ने बताया कि राज्य के वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और उनके सख्त निर्देशानुसार ही पूरा विभाग इस समय हाई अलर्ट पर काम कर रहा है।
वन विभाग ने इस संकट की घड़ी में स्थानीय ग्रामीणों और आम नागरिकों से भी एक भावुक अपील की है कि वे जंगलों और आसपास के इलाकों में वन्यजीव संरक्षण (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) को लेकर सजग रहें। अगर किसी भी ग्रामीण को कोई वन्यप्राणी या पक्षी घायल, प्यास से तड़पता, असामान्य स्थिति में या मृत अवस्था में दिखाई देता है, तो वे बिना एक पल गंवाए इसकी सूचना तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को दें, ताकि समय पर उसकी मदद की जा सके।
24 घंटे एक्टिव रहेगा आपातकालीन नंबर
बेजुबानों की जिंदगी बचाने और आम जनता से सीधा संपर्क स्थापित करने के लिए वन विभाग ने एक विशेष सहायता केंद्र (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) स्थापित किया है। विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर कंट्रोल रूम नंबर 247 तथा मोबाइल नंबर +91-9301321797 जारी किया गया है, जो चौबीसों घंटे चालू रहेगा। वन मंडलाधिकारी ने साफ कहा है कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा से निपटने और पर्यावरण संतुलन (Khairagarh Wildlife Heatwave Crisis) को बनाए रखने के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह मुस्तैदी खैरागढ़ के जंगलों में रह रहे बाकी बेजुबानों को इस जानलेवा गर्मी से कितना बचा पाती है।




