सीजी भास्कर, 30 मई : नवा रायपुर की खूबसूरत वादियों में बसे एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी और नंदनवन चिड़ियाघर (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) की सैर करने का शौक रखने वाले प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और तगड़ी खबर सामने आई है। वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक ऐसा आक्रामक आदेश जारी किया है, जिसने वीकेंड पर मौज-मस्ती करने वाले परिवारों के बजट का गणित पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
विभाग ने सफारी की एंट्री फीस, एसी बस राइड और अन्य पर्यटक सुविधाओं की टिकट दरों में 50 फीसदी से लेकर सीधे 100 फीसदी (दोगुनी) तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी कर दी है। इस नए और अप्रत्याशित वित्तीय बोझ के बाद (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) को लेकर पर्यटकों के बीच आक्रोश और सस्पेंस का माहौल बन गया है, क्योंकि अब आम आदमी के लिए वन्यजीवों का दीदार करना बेहद महंगा सौदा साबित होने वाला है।
दरअसल, वन विभाग का तर्क है कि बढ़ती हुई महंगाई और 800 एकड़ में फैली इस विशाल सफारी के रखरखाव (मैंटेनेंस) का खर्च आसमान छू रहा है। वन्यजीवों के संरक्षण, उनके खान-पान और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास आधुनिक सुविधाएं देने के नाम पर इस रेट हाइक को जायज ठहराया जा रहा है। लेकिन धरातल पर इस आदेश ने मिडिल क्लास परिवारों की जेब खाली करने का पूरा इंतजाम कर दिया है। अब तक जो लोग बेहद कम खर्च में पूरे परिवार को शेर, बाघ और भालू दिखाने नवा रायपुर ले जाते थे, उन्हें अब अपनी जेब दोगुनी ढीली करनी होगी। विभाग ने जनता के भारी विरोध की परवाह न करते हुए इस कड़े कदम (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) को तत्काल प्रभाव से पूरे परिसर में लागू करवा दिया है।
हर कैटेगरी पर चला वन विभाग का हंटर
नई रेट पॉलिसी के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे वाकई आम जनता को झकझोरने वाले हैं। मासूम बच्चों से लेकर सात समंदर पार से आने वाले विदेशी मेहमानों तक, विभाग ने किसी को नहीं बख्शा है। नए नियमों के मुताबिक, 6 से 12 साल तक के बच्चों का जो जू एंट्री टिकट पहले महज़ 25 रुपये का हुआ करता था, उसे अब सीधे दोगुना बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। वहीं, 12 साल से अधिक उम्र के बड़ों के लिए टिकट का शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर सीधा 100 रुपये तय किया गया है। सबसे बड़ा झटका विदेशी पर्यटकों को लगा है, जिनकी एंट्री फीस 200 रुपये से बढ़ाकर एकमुश्त 500 रुपये कर दी गई है। इस अचानक की गई बढ़ोतरी से पर्यटन उद्योग को होने वाले नुकसान (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) की चिंता किए बिना ही अफसरों ने फाइल पर अपने दस्तखत कर दिए हैं।
इस पूरी नई पॉलिसी में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सस्पेंस वरिष्ठ नागरिकों (60 साल से ऊपर) और दिव्यांगजनों को लेकर सामने आया है। वैसे तो सरकारी दावों के मुताबिक उन्हें पहले की तरह ही नि:शुल्क (मुफ्त) प्रवेश की सुविधा दी जाएगी, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा पेचीदा क्लॉज जोड़ दिया गया है जिसने बुजुर्गों को निराश कर दिया है। नए नियम में साफ कर दिया गया है कि यह मुफ्त एंट्री की सुविधा शनिवार, रविवार (वीकेंड), सार्वजनिक अवकाश और किसी भी सरकारी छुट्टी के दिन लागू कतई नहीं होगी। यानी जिन दिनों में आम तौर पर बुजुर्ग अपने पोते-पोतियों के साथ घूमने आते हैं, उन्हीं दिनों उनसे भी पूरा टिकट वसूला जाएगा। इस संवेदनहीन बदलाव (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) के खिलाफ सोशल मीडिया पर पर्यटकों ने विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
800 एकड़ की प्राकृतिक धरोहर
नवा रायपुर के सेक्टर-39 में स्थित यह विहंगम जंगल सफारी करीब 800 एकड़ के विशाल परिक्षेत्र में फैली हुई है, जिसके भीतर 130 एकड़ का ऐतिहासिक खांडवा जलाशय भी मौजूद है। इस जलाशय में हर साल ठंड के दिनों में हजारों किलोमीटर दूर से विदेशी प्रवासी पक्षी डेरा डालते हैं। वर्तमान में इस सफारी में पर्यटकों के आकर्षण के लिए शाकाहारी वन्यजीव, भालू, टाइगर और लॉयन (शेर) सफारी जैसे चार अलग-अलग रोमांचक जोन बनाए गए हैं, जहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक माहौल में खुला छोड़ा गया है। इस वक्त यहां 3 बाघ, 4 भालू और करीब 80 से अधिक चीतल, सांभर, नीलगाय और ब्लैक बक जैसे शाकाहारी जानवर मौजूद हैं। इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का नया नियम (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) अब पूरी तरह से कमर्शियल हो चुका है।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि क्या टिकट की कीमतें दोगुनी करने के बाद विभाग सफारी के भीतर बसों की संख्या बढ़ाएगा? क्या पर्यटकों को अब बाघ और शेर देखने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा? बहरहाल, वन विभाग के इस फैसले ने पर्यटकों की जेब पर जो डाका डाला है, उसने वीकेंड की खुशियों को फीका जरूर कर दिया है। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि इस बढ़े हुए शुल्क के बाद सफारी पहुंचने वाले पर्यटकों की गति (CG Jungle Safari Ticket Price Hike) में कितनी गिरावट आती है और क्या वाकई यह राजस्व वृद्धि वन्यजीवों के संरक्षण में कोई बड़ा और ईमानदार बदलाव ला पाती है।




