सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ग्रामीण पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार, अवैध शराब के सिंडिकेट और खाकी (CG Police Inspector Suspended) की साख पर बट्टा लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एक बहुत बड़ा और आक्रामक प्रशासनिक धमाका हुआ है। गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध शराब, जुए और सट्टे के काले कारोबार को रोकने में नाकाम रहने और रेड के दौरान आरोपी के साथ साठगांठ करने के गंभीर आरोप में थाना प्रभारी (TI) निरीक्षक दीपेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने इस संबंध में एक कड़ा और आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई और इसके पीछे छिपे सस्पेंस के बाद पूरे पुलिस महकमे और राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में (CG Police Inspector Suspended) को लेकर हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर खाकी के भीतर छिपे ‘विभीषणों’ पर एक बड़ा प्रहार है।
दरअसल, गोबरा नवापारा इलाके से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पुलिस की नाक के नीचे अवैध मदिरा का एक समानांतर नेटवर्क चल रहा है। एसपी ग्रामीण द्वारा थाना प्रभारी को इन अवैध गतिविधियों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के कड़े निर्देश दिए गए थे, लेकिन टीआई साहब शिकायतों की फाइलों को दबाकर बैठे रहे। मामला तब पूरी तरह से आक्रामक और बेकाबू हो गया जब 29 मई को एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) रायपुर की देहात टीम ने गोबरा नवापारा स्थित लल्ला सोनवानी के रसूखदार ढाबे पर अचानक छापा मारा। इस रेड में भारी मात्रा में अवैध शराब ज़ब्त की गई और यह साबित हो गया कि स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से ही यह मयखाना चल रहा था। जैसे ही छापे की खबर टीआई दीपेश जायसवाल को मिली, वे भी अपनी साख बचाने कछुआ गति से मौके पर पहुंचे। लेकिन वहां उन्होंने जो कड़ा कदम (CG Police Inspector Suspended) उठाने के बजाय संदिग्ध आचरण दिखाया, उसने उनकी नौकरी पर ही गाज गिरा दी।
एसीसीयू की रिपोर्ट पर एसपी ने लिया आक्रामक एक्शन
पर्दे के पीछे का असली सस्पेंस यह है कि मौके पर पहुंचने के बाद इंस्पेक्टर दीपेश जायसवाल ने ईमानदारी दिखाने के बजाय अपनी संदेहास्पद संनिष्ठा का खुला प्रदर्शन कर दिया। एसीसीयू की टीम ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर उजागर किया है कि कार्रवाई के दौरान टीआई साहब ने शराब माफिया और मुख्य आरोपी लल्ला सोनवानी को भीड़ से अलग ले जाकर एकांत में काफी देर तक सीक्रेट बातचीत की। वरिष्ठ अधिकारियों और एसीसीयू के जांबाजों ने इस गुफ़्तगू को कैमरे में कैद कर लिया और इसे घोर अनुशासनहीनता, पदीय दुरुपयोग और संदिग्ध व्यवहार की श्रेणी में माना, जिससे पुलिस विभाग की निष्पक्षता को भारी नुकसान (CG Police Inspector Suspended) पहुंचा।
प्राथमिक जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया कि थाना प्रभारी न केवल अपने इलाके में नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल रहे, बल्कि वे खुद अपराधियों को संरक्षण दे रहे थे। खाकी को दागदार करने वाले इस कृत्य के बाद एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने बिना समय गंवाए उन्हें सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया। पुलिस विभाग की छवि में बड़ा बदलाव (CG Police Inspector Suspended) लाने के उद्देश्य से की गई इस कार्रवाई के तहत अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ग्रामीण अभिषेक झा को पूरे मामले की कमान सौंपी गई है। उन्हें सात दिनों के भीतर अपनी सीक्रेट जांच रिपोर्ट सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है, ताकि टीआई के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
थानों में मलाई खाने वाले कप्तानों को कड़ा अल्टीमेटम
रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा की गई इस बेहद आक्रामक और त्वरित कार्रवाई ने पूरे जिले के थाना प्रभारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। एसपी कार्यालय ने साफ कर दिया है कि जो भी अधिकारी अपने क्षेत्र में अवैध शराब, जुआ, सट्टा या कबाड़ के धंधे को रोकने में ढिलाई बरतेगा, उसका हश्र भी दीपेश जायसवाल जैसा ही होगा। यह सख्त रवैया अब रायपुर पुलिस का एक नया नियम (CG Police Inspector Suspended) बन चुका है कि दागी और संदिग्ध आचरण वाले पुलिसकर्मियों को थानों की मलाईदार पोस्टिंग से दूर रखा जाएगा।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि क्या एएसपी अभिषेक झा की सात दिनों की जांच के बाद सस्पेंड टीआई को सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाएगा? क्या शराब तस्कर लल्ला सोनवानी के फोन कॉल डिटेल (CDR) खंगालने पर पुलिस विभाग के कुछ अन्य बड़े चेहरों के नाम भी बेनकाब होंगे? बहरहाल, इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने यह तो साफ कर दिया है कि रायपुर ग्रामीण में अब अपराधियों के मददगारों की खैर नहीं है। आने वाले दिन इस पूरे मामले के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, जहां जांच की गति (CG Police Inspector Suspended) यह तय करेगी कि क्या राजधानी की पुलिस अपने भीतर के इस काले तंत्र को पूरी तरह साफ कर पाती है या नहीं।




