सीजी भास्कर, 14 जुलाई। जिस अस्पताल में मरीज बीमारी से लड़ने आते हैं, वहीं अगर संक्रमण उनका इंतजार कर रहा हो, तो इसे व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता कहा जाएगा। बस्तर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डिमरापाल मेडिकल कॉलेज की तस्वीर कुछ ऐसी ही सामने आई है, जहां वार्डों और गलियारों में टॉयलेट का गंदा पानी फैलने से मरीजों की जान पर नया खतरा मंडराने लगा है। (Jagdalpur hospital negligence)
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अस्पताल निर्माण के दौरान जरूरत से कम क्षमता की बिछाई गई पाइपलाइन : Jagdalpur hospital negligence
यह केवल एक चोक पाइपलाइन की कहानी नहीं, बल्कि वर्षों की अनदेखी और खराब इंजीनियरिंग का परिणाम है। वर्ष 2018 में अस्पताल निर्माण के दौरान जरूरत से कम क्षमता की पाइपलाइन बिछा दी गई। आज वही गलती हजारों मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की मरम्मत और सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी बदतर हैं। सवाल यह है कि पैसा आया, लेकिन व्यवस्था क्यों नहीं बदली?
अधीक्षक ने खुद संभाला मोर्चा, कर्मचारियों के साथ खड़े होकर करवाई सफाई
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू को खुद मैदान में उतरकर सफाई व्यवस्था संभालनी पड़ी। करीब दो घंटे तक उन्होंने कर्मचारियों के साथ खड़े होकर पूरे ग्राउंड फ्लोर और प्रभावित हिस्सों की सफाई करवाई। वहीं पीडब्ल्यूडी की अनुपस्थिति ने भी कई सवाल खड़े कर दिए।
लोगों ने कहा- मरीज ठीक होने के बजाय और पड़ सकते हैं बीमार : Jagdalpur hospital negligence
अस्पताल पहुंचे नूर मोहम्मद शेख ने बताया कि वार्ड तक जाने वाले रास्ते में टॉयलेट का गंदा पानी फैला था और मरीज बदबू व गंदगी के बीच आने-जाने को मजबूर थे। वहीं ईश्वर बघेल ने कहा कि ऐसी लापरवाही से मरीज ठीक होने के बजाय और बीमार पड़ सकते हैं। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरेन सिन्धा ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल का सीवरेज सामान्य गंदा पानी नहीं होता। इसमें खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं, जो कमजोर मरीजों में संक्रमण, सेप्सिस, पीलिया, सांस की बीमारी और अन्य गंभीर संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा सकते हैं।
सवाल सिर्फ एक अस्पताल की सफाई का नहीं है, सवाल यह है कि क्या बस्तर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल अब इलाज का केंद्र है या संक्रमण का नया ठिकाना? जब करोड़ों की इमारत और बजट होने के बावजूद मरीजों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?



