सीजी भास्कर, 30 मई : लाल आतंक और हिंसा का खौफनाक रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके बस्तर (Bastar Recanalization Camp) के पुनर्वासित युवाओं (लोन वराटू के तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों) के पारिवारिक और सामाजिक जीवन को दोबारा खुशहाल बनाने की दिशा में शनिवार को जगदलपुर में एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक पहल की गई है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के महारानी अस्पताल जगदलपुर में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के विशेष सहयोग से एक वृहद ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया।
यूरोलॉजिकल सोसायटी वेस्टर्न ज़ोन एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर के शीर्ष यूरोलॉजिस्ट डॉक्टरों के दल ने इस विशेष चैरिटेबल कैंप में अपनी सेवाएं दीं। शिविर का मुख्य उद्देश्य उन पुनर्वासित युवाओं की नसबंदी खोलने (रिकैनालाइजेशन ऑपरेशन) के लिए स्वास्थ्य परीक्षण करना है, जिन्हें नक्सली संगठन में रहने के दौरान जबरन नसबंदी जैसी अमानवीय प्रताड़ना से गुजरना पड़ा था। इस कल्याणकारी कदम (Bastar Recanalization Camp) के बाद इन युवाओं के जीवन में अब खुद का परिवार बसाने और पिता बनने का अधूरा सपना सच होने जा रहा है।
यह कोई सामान्य नसबंदी ऑपरेशन शिविर नहीं है, बल्कि इसके पीछे माओवादी संगठन का वह काला और घिनौना सस्पेंस छुपा हुआ है, जहां वे जंगलों में रहने वाले युवक-युवतियों को शादी करने और बच्चा पैदा करने की इजाजत नहीं देते। नक्सली कमांडर संगठन के भीतर युवाओं को मजबूर कर उनकी नसबंदी करवा देते हैं, ताकि वे पारिवारिक मोहमाया से दूर रहें।
आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे बस्तर के इन बेटों को इस सामाजिक दंश और शारीरिक नुकसान (Bastar Recanalization Camp) से मुक्ति दिलाने के लिए ही इस विशेष ऑपरेशन शिविर की रूपरेखा तैयार की गई है। शनिवार को आयोजित इस शिविर में कुल 28 पुनर्वासित युवाओं का पंजीयन कर विशेषज्ञों द्वारा उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद अत्याधुनिक सूक्ष्म तकनीकों के माध्यम से इनकी नसबंदी खोलने के जटिल ऑपरेशन की प्रक्रिया संपादित की जाएगी। इस संवेदनशील ढर्रे में आया यह बड़ा बदलाव (Bastar Recanalization Camp) बस्तर के इन युवाओं को समाज में एक नया और सम्मानजनक वैवाहिक जीवन जीने की आजादी देगा।
एम्स के डॉक्टरों को दिया स्मृति चिह्न
इस ऐतिहासिक शिविर की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऑपरेशन के लिए आए युवाओं का उत्साहवर्धन करने और उनके मन से डर को निकालने के लिए खुद बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी., कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित पुलिस और प्रशासन के तमाम आला अधिकारी महारानी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने इन युवाओं के पास बैठकर उनसे सीधा संवाद किया और उन्हें पुरानी कड़वी यादों को भूलकर एक सकारात्मक और खुशहाल पारिवारिक जीवन की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया। बस्तर पुलिस का यह मानवीय नियम (Bastar Recanalization Camp) उन भटके हुए युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो आज भी नक्सलियों के झूठे बहकावे में आकर जंगलों में छिपे हुए हैं।
इस जटिल और बेहद खर्चीले ऑपरेशन को पूरी तरह नि:शुल्क और चैरिटी के तौर पर करने के लिए पहुंचे वेस्टर्न ज़ोन यूरोलॉजिकल सोसाइटी और एम्स रायपुर के डॉक्टरों की टीम को बस्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय बसाक और सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद की निगरानी में जिला अस्पताल के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी इस मुहिम में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चिकित्सीय चुनौती यह है कि सालों पुरानी इस नसबंदी को दोबारा पूरी तरह सक्रिय करने में डॉक्टरों के इस ऑपरेशन की गति (Bastar Recanalization Camp) और सफलता का प्रतिशत कितना सटीक रहता है, क्योंकि डॉक्टरों की इसी मेहनत पर 28 युवाओं के वंश और आने वाली पीढ़ी का भविष्य टिका हुआ है। बहरहाल, बस्तर प्रशासन की इस आक्रामक और मानवीय पहल ने यह साफ कर दिया है कि लोकतंत्र बंदूक की गोली से नहीं, बल्कि अपनों के गले लगाने और उनके घावों पर मरहम लगाने से मजबूत होता है।




