सीजी भास्कर, 30 मई : देश की सर्वोच्च सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के पहले और सबसे बड़े मंत्रिपरिषद पुनर्गठन (Union Cabinet Rejig) की अंतिम स्क्रिप्ट तैयार कर चुकी है। अंदरूनी सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के मुताबिक, आगामी 15 से 18 जून के बीच केंद्रीय कैबिनेट का पूरी तरह से कायाकल्प होने जा रहा है।
यह प्रशासनिक सर्जरी केवल मंत्रालयों का काम सुधारने के लिए नहीं है, बल्कि देश के महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पूरी चुनावी मशीनरी को आक्रामक मोड में लाने की एक सोची-समझी रणनीति है। इस संभावित विस्तार (Modi Cabinet Expansion) ने सरकार के भीतर कई दिग्गजों की कुर्सी पर संकट खड़ा कर दिया है, क्योंकि लचर परफॉर्मेंस के आधार पर एक दर्जन से अधिक मंत्रियों की छुट्टी होना तय माना जा रहा है।
यह कोई रूटीन प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह सख्त कार्यशैली छुपी हुई है जहां सुस्त मंत्रियों के लिए कोई जगह नहीं है। सूत्रों का कहना है कि जिन मंत्रालयों के कामकाज की रफ्तार धीमी रही है, उनके मंत्रियों को हटाकर सीधे संगठन के काम में झोंक दिया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती दी जा सके। इस बड़े राजनीतिक कदम (Modi Cabinet Expansion) के बाद से पूरी दिल्ली के सियासी हलकों में कयासों और कड़े सस्पेंस का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू का बढ़ेगा वजन
इस महा फेरबदल का सबसे क्रांतिकारी और सस्पेंस से भरा पहलू यह है कि भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के शीर्ष और जमीनी युवा नेताओं को सीधे केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। पीएम मोदी इस अभूतपूर्व फैसले के जरिए देश के करोड़ों युवा वोटर्स को एक बड़ा संदेश देना चाहते हैं। पार्टी के भीतर सेकंड-लाइन लीडरशिप यानी भविष्य की कमान तैयार करने के लिए युवाओं को सीधे देश की मुख्य नीति-निर्धारक कुर्सी सौंपी जाएगी। युवाओं को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने के इस आक्रामक निर्णय (Modi Cabinet Expansion) ने पारंपरिक वरिष्ठता वाली राजनीति के ढर्रे को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुनबे को एकजुट रखने के लिए सहयोगी दलों को भी इस विस्तार में बड़ी सौगात मिलने जा रही है। बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों और जेडीयू (JDU) की पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी का कद केंद्रीय कैबिनेट में और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। चर्चा है कि जेडीयू के खाते में एक से दो नए महत्वपूर्ण विभाग या राज्य मंत्री के पद आ सकते हैं, जिससे बिहार के भीतर एनडीए के वोट बैंक के समीकरणों में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव (Modi Cabinet Expansion) देखने को मिलेगा।
मंत्रियों के चयन के लिए बना कड़ा पैमाना
15 से 18 जून के बीच होने वाले इस कैबिनेट विस्तार में उन राज्यों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी जहां आने वाले महीनों में विधानसभा के चुनाव होने तय हैं। नए मंत्रियों के चयन के लिए आलाकमान ने एक बेहद कड़ा नियम (Modi Cabinet Expansion) बनाया है, जिसके तहत केवल जातीय समीकरण (सोशल इंजीनियरिंग) ही नहीं, बल्कि नेता की बेदाग छवि और जनता के बीच उसकी सक्रियता को ही मुख्य आधार माना जा रहा है। हटाए जाने वाले मंत्रियों की जगह जो नए और ऊर्जावान चेहरे शामिल किए जाएंगे, वे सीधे तौर पर सरकार की जन-हितैषी नीतियों को जनता तक पहुंचाएंगे।
अब पूरी देश की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि जिन 12 मंत्रियों की छुट्टी होने वाली है, वे बड़े नाम कौन से हैं और क्या इस बड़े बदलाव के बाद नीतिगत फैसलों की गति (Modi Cabinet Expansion) उतनी तेज हो पाएगी जितनी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं? इस फेरबदल के जरिए सरकार न केवल वर्तमान चुनौतियों से निपटना चाहती है, बल्कि साल 2029 के महा-रोडमैप की मजबूत नींव भी रखना चाहती है। बहरहाल, जून के मध्य में होने वाला यह महा कैबिनेट विस्तार देश की भावी राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करने वाला साबित होगा।




