सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के सरगुजा में बीजेपी विधायक और नायब तहसीलदार (Surguja MLA Tehsildar Row ) के बीच हुआ हिंसक टकराव अब एक जिले की सीमा को लांघकर पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा राजनीतिक कुरुक्षेत्र बन चुका है। तहसीलदारों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के तीखे हमलों के बाद अब बिलासपुर की कोटा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर साय सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने प्रदेश की चरमराती कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में इस वक्त पूरी तरह से अराजकता का माहौल है।
जब जनता की रक्षा करने की कसम खाने वाले सत्ता पक्ष के माननीय विधायक ही खुद सरेआम कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इस आक्रामक सियासी बयानबाजी (Surguja MLA Tehsildar Row) ने इस पूरे प्रशासनिक विवाद के पीछे चल रहे बड़े राजनीतिक सस्पेंस को और गहरा कर दिया है।
दरअसल, यह विवाद केवल एक अधिकारी और नेता के बीच का नहीं है, बल्कि यह कहानी बन चुकी है सत्ताधारी दल के उस अहंकार की जो ब्यूरोक्रेसी को अपने इशारों पर नचाना चाहता है। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने दोटूक लहजे में कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि सुशासन का ढोंग रचने वाली भाजपा के राज में खुलेआम सरकारी दफ्तरों में घुसकर अधिकारियों को पीटा जा रहा है। उन्होंने इस घटना को प्रदेश में मचे ‘जंगलराज’ का एक कड़ा संकेत बताया। इस बड़े राजनैतिक कदम (Surguja MLA Tehsildar Row) के बाद कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में सरकार को घेरने की कूटनीतिक तैयारी में जुट गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में भारी तनाव का माहौल है।
खुद सिंघम बनने के ढर्रे पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले में बीजेपी विधायक के काम करने के हिंसक ढर्रे को आड़े हाथों लेते हुए एक बहुत ही कड़ा और तार्किक सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यदि थोड़ी देर के लिए बीजेपी विधायक के दावों को सच मान भी लिया जाए कि उनकी भतीजी (आवेदिका) के साथ तहसील कार्यालय में किसी भी प्रकार की बदसलूकी या अभद्रता हुई थी, तो उन्हें एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते कड़ा कदम (Surguja MLA Tehsildar Row) उठाते हुए नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया का रास्ता अपनाना चाहिए था। उन्हें तत्काल थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी, न कि खुद लाव-लश्कर लेकर सिंघम की तरह कानून को अपने हाथ में लेना चाहिए था।
अटल श्रीवास्तव ने पद की गरिमा की याद दिलाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही रसूखदार जनप्रतिनिधि क्यों न हो, उसे कानून से ऊपर होने का कोई विशेषाधिकार नहीं मिल जाता। विवादों का समाधान केवल और केवल कड़े नियम (Surguja MLA Tehsildar Row) और कूटनीतिक कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने मामले के दूसरे पहलू यानी ब्यूरोक्रेसी के ढर्रे में बड़े बदलाव (Surguja MLA Tehsildar Row) की वकालत करते हुए तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल दागे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को भी जनता से प्राप्त आवेदनों का समय पर और बिना किसी दुर्भावना के निराकरण करना चाहिए, ताकि ऐसे विवादों की स्थिति ही पैदा न हो।
‘सीएम से संभल नहीं रहा प्रदेश, गृहमंत्री दूसरे राज्यों के दौरों में मस्त’
इस पूरे कांड के जरिए पूरी साय सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कांग्रेस विधायक ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश के गृहमंत्री पर तीखा और आक्रामक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ का यह विशाल प्रदेश और इसके कड़े प्रशासनिक अधिकारी संभल नहीं रहे हैं। कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी है, क्योंकि राज्य के गृहमंत्री छत्तीसगढ़ के आंतरिक मानवीय और सामाजिक संकटों को सुलझाने के बजाय दूसरे राज्यों के राजनीतिक दौरों और चुनावी प्रचारों में पूरी तरह व्यस्त हैं। सरकार की इसी घोर लापरवाही और अमानवीय विफलता के कारण ही आज प्रदेश में प्रशासनिक विंग और राजनीतिक विंग के बीच एक खौफनाक गृहयुद्ध छिड़ गया है।
अटल श्रीवास्तव ने इस पूरे विवाद को दोनों पक्षों की विफलता का एक बड़ा सस्पेंस बताते हुए कहा कि इस मामले में दोनों ही पक्षों की गंभीर गलतियां सामने आई हैं, जहां विधायक को अपने संवैधानिक पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों को भी अपने कर्तव्यों का जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से निर्वहन करना चाहिए था।




