सीजी भास्कर, 15 जुलाई। सड़क दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी (Chhattisgarh High Court) की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आधार कार्ड के आधार पर किसी व्यक्ति की उम्र तय नहीं की जा सकती। साथ ही बीमा दावों को लेकर भी कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसका असर भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई पर पड़ सकता है।
यह मामला एक सड़क हादसे से जुड़ा था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने बीमा पॉलिसी की प्रभावी तिथि, उम्र के प्रमाण और मुआवजे से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर अपना फैसला सुनाया।
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आधार कार्ड को उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं माना Chhattisgarh High Court
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा मामलों में केवल आधार कार्ड के आधार पर उम्र तय करना उचित नहीं है। अदालत ने माना कि उम्र का निर्धारण रिकॉर्ड पर उपलब्ध अन्य विश्वसनीय साक्ष्यों को भी ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित दावेदार की उम्र ट्रिब्यूनल द्वारा मानी गई 68 वर्ष के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार 61 से 65 वर्ष के बीच मानी।
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बीमा प्रीमियम जमा होने मात्र से नहीं शुरू होती जिम्मेदारी
मामले में वाहन मालिक की ओर से दलील दी गई थी कि दुर्घटना से पहले ही बीमा प्रीमियम जमा हो चुका था, इसलिए बीमा कंपनी मुआवजा देने की जिम्मेदार है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि बीमा अनुबंध केवल प्रीमियम जमा होने से प्रभावी नहीं हो जाता। बीमा कंपनी द्वारा प्रस्ताव स्वीकार करने और पॉलिसी जारी होने की तिथि एवं समय से ही बीमा अनुबंध लागू माना जाएगा।
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क्या था पूरा मामला Chhattisgarh High Court
मामला एक सड़क दुर्घटना से संबंधित तीन अपीलों का था। हादसे में दो लोगों की जान चली गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसका पैर काटना पड़ा। टाटा सूमो के मालिक और चालक ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वहीं पीड़ित पक्ष ने मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए क्रॉस ऑब्जेक्शन दायर किया था।
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हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने वाहन मालिक और चालक की अपीलें खारिज (Chhattisgarh High Court) कर दीं। वहीं दावेदारों की ओर से दायर क्रॉस ऑब्जेक्शन को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए तीनों मामलों में मुआवजे की राशि बढ़ाने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामलों में उम्र का निर्धारण करते समय सभी उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए और केवल आधार कार्ड को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।



