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Home » Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management : छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं से गद्दारी करने वाले सीधे जाएंगे जेल!

Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management : छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं से गद्दारी करने वाले सीधे जाएंगे जेल!

By Newsdesk Admin
03/06/2026
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Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management
Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management

सीजी भास्कर, 03 जून :  छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के पसीने से सींचने वाले अन्नदाताओं (Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management)  के हितों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के तेवर बेहद आक्रामक हो चुके हैं। आगामी खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले बिचौलियों, जमाखोरों और कालाबारी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में कृषि और सहकारिता विभाग के अमले को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है।

Contents
  • क्या है ‘नैनो यूरिया’ और ‘नैनो डीएपी’ लिक्विड?
  • पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और भारतीय कृषि
  • जमीन के अनुसार ‘खाद की किस्तें’
  • जिलावार खाद भंडारण एवं वितरण की अद्यतन स्थिति (Data Table)

राज्य सरकार का एकमात्र संकल्प है कि इस बार खेती-किसानी के सीजन में किसी भी सहकारी समिति या केंद्र में खाद-बीज की किल्लत न होने पाए और हर एक किसान को उसकी जरूरत के मुताबिक समय पर रासायनिक और आधुनिक खाद सुलभता से मिल सके। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अचूक रणनीति तैयार की है, जिसके तहत जमीनी स्तर पर पल-पल की रिपोर्ट ली जा रही है।

वैश्विक स्तर पर, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रासायनिक उर्वरकों के आयात और आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधाएं आने की आशंका जताई जा रही है। विदेशी बाजारों की इस अनिश्चितता को भांपते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दूरदर्शिता का परिचय दिया है और महीनों पहले से ही राज्य में अग्रिम भंडारण की बहुस्तरीय योजना पर काम शुरू करवा दिया था। केंद्र सरकार से कड़े कूटनीतिक तालमेल के बाद छत्तीसगढ़ को इस खरीफ सीजन के लिए कुल 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का एक बड़ा और ऐतिहासिक लक्ष्य आवंटित कराया गया है। इस विशाल कोटे में किसानों की सबसे मुख्य जरूरत यानी यूरिया 7.25 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 3 लाख मीट्रिक टन, एमओपी 80 हजार मीट्रिक टन, एनपीके 2.5 लाख मीट्रिक टन और एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल है। सरकार की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में ही राज्य के विभिन्न गोदामों और सोसायटियों में करीब 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित स्टॉक भौतिक रूप से मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है।

प्रशासनिक स्तर पर इस महा-अभियान को गति देने के लिए कृषि विभाग के संचालक राहुल देव स्वयं मैदानी स्तर पर कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने विभागीय तैयारियों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए बताया कि राज्य के सभी प्रमुख रेल पॉइंट पर खाद की नई रैक लगातार पहुंच रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जून के शुरुआती हफ्ते में ही रायपुर जिले के तिल्दा रैक पॉइंट पर 1319 मीट्रिक टन, महासमुंद के बेलसोंडा में 1316 मीट्रिक टन, रायगढ़ के खरसिया में 2646 मीट्रिक टन और बालोद जिला रैक पॉइंट पर 1319 मीट्रिक टन यूरिया की नई खेप उतर रही है। इस तरह कुल 6600 मीट्रिक टन यूरिया की यह ताजा खेप सीधे सोसायटियों में भेजी जा रही है, जिससे ग्रामीण अंचलों के किसानों को भारी राहत मिलेगी। इसके साथ ही, जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद वितरण केंद्रों का औचक निरीक्षण करें और यदि कहीं भी कृत्रिम किल्लत या गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों और डीलर्स पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

अगर जिलावार जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो सरकार का (Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management) ढांचा पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है। गरियाबंद जैसे आदिवासी बहुल जिले में वर्तमान में 17,818 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक के साथ-साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का पर्याप्त स्टॉक सोसायटियों में पहुंच चुका है। इसी तरह नवगठित खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की मुकुरमुडा समिति में खरीफ सीजन की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए 362 मीट्रिक टन उर्वरकों का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया गया है ताकि किसानों को ऐन वक्त पर भटकना न पड़े।

मुंगेली जिले से पिछले दिनों यूरिया वितरण के दौरान सर्वर और तकनीकी प्रक्रिया के कारण कुछ अस्थायी दिक्कतें सामने आई थीं, जिस पर जिला प्रशासन ने त्वरित एक्शन लेते हुए न केवल समस्या का समाधान किया, बल्कि अपनी सीधी निगरानी में किसानों को कतारमुक्त व्यवस्था से खाद उपलब्ध कराया। बस्तर संभाग की बात करें तो वहां खरीफ सीजन के लिए कुल 46,050 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके मुकाबले वर्तमान में ही समितियों और निजी विक्रेताओं के पास 29,719 मीट्रिक टन यानी कुल लक्ष्य का लगभग 64 प्रतिशत खाद पहले से ही उपलब्ध करा दिया गया है।

राजधानी रायपुर के भीतर भी यूरिया की सोसायटियों में वर्तमान उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन है, जबकि संग्रहण केंद्रों में कुल 10,732 मीट्रिक टन यूरिया सुरक्षित रखा गया है। वहीं डीएपी की उपलब्धता भी 3,092 मीट्रिक टन बनी हुई है। इस बार छोटे और सीमांत किसानों को कतारों के झंझट से बचाने के लिए रायपुर जिला प्रशासन ने जोत (जमीन) के आधार पर वितरण की कड़क किश्तों का निर्धारण किया है। इस मानवीय व्यवस्था के तहत ढाई एकड़ तक की कृषि भूमि वाले सीमांत और गरीब किसानों को उनकी पूरी यूरिया की मात्रा एकमुश्त यानी एक ही बार में दे दी जाएगी ताकि उन्हें बार-बार केंद्र न आना पड़े। वहीं, ढाई से पांच एकड़ वाले लघु कृषकों को दो किश्तों में और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े किसानों को तीन किश्तों में सुगमतापूर्वक यूरिया प्रदान किया जाएगा। राजनांदगांव जिले में भी इस बार पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत अधिक यानी कुल 42,997 मीट्रिक टन खाद का अग्रिम स्टॉक जमा है, जिसमें से 10,874 से अधिक किसानों को उनकी जरूरत का खाद बांटा जा चुका है।

कोरिया और बिलासपुर जिलों में भी वितरण की रफ्तार काफी कड़क है। बिलासपुर जिले को मिले 68,950 टन के लक्ष्य के मुकाबले 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण पूरा हो चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा है। जिले में इस समय 22,996 टन यूरिया tobacco और 5,621 टन डीएपी का लाइव स्टॉक मौजूद है। कोयलांचल क्षेत्र कोरबा में भी अप्रैल और मई के महीनों में कुल 2101 मीट्रिक टन से अधिक खाद का वितरण सीधे खेतों तक पहुंचाया जा चुका है, जिसमें अकेले मई महीने में रिकॉर्ड 1910 मीट्रिक टन खाद बांटी गई। धमतरी जिले में भी 19,358 मीट्रिक टन के कुल भंडारण में से 4,318 मीट्रिक टन खाद किसानों के हाथों में सौंपी जा चुकी है और शेष 15,040 मीट्रिक टन का स्टॉक सोसायटियों में सुरक्षित है।

खेती की लगातार बढ़ती लागत को कम करने और पारंपरिक रासायनिक खादों पर अत्यधिक निर्भरता को घटाने के लिए साय सरकार इस बार एक बेहतरीन वैकल्पिक (Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management) नीति पर भी काम कर रही है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर राज्य के किसानों को नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में कृषि विभाग ने पूरी संवेदनशीलता बरतते हुए यह साफ कर दिया है कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह स्वैच्छिक और वैकल्पिक है। किसी भी सहकारी समिति द्वारा किसानों की बिना मर्जी या बिना सहमति के उन्हें जबरन नैनो यूरिया नहीं थमाया जाएगा। सरकार का मूल उद्देश्य किसानों को आधुनिक विकल्प देकर उनके पैसों की बचत कराना है।

किसानों के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी पर सरकार के सख्त और आक्रामक तेवरों को बयां करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि जो भी व्यक्ति या संस्था किसानों के पसीने की कमाई से खिलवाड़ करेगी, उसकी सही जगह जेल की सलाखें होंगी। इसी कड़ी में कार्रवाई करते हुए कोरिया जिले की जिल्दा सहकारी समिति में उर्वरक वितरण और स्टॉक में गंभीर वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से समिति प्रबंधक के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी है और विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट शब्दों में राज्य के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को हिदायत दी है कि इस पूरे सीजन में वे वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर मैदानी स्तर पर सुचारू (Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management) निगरानी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री खुद समय-समय पर इसकी कड़क समीक्षा कर रहे हैं। राज्य प्रशासन का यह कड़ा और मानवीय रुख छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को यह भरोसा दिलाता है कि इस बार उनकी फसलों को पोषण समय पर मिलेगा और उनकी मेहनत का एक-एक कतरा सुरक्षित रहेगा। सरकार की इस चौतरफा चौकसी के कारण पूरे प्रदेश में इस समय (Chhattisgarh Fertilizer Distribution Management) वितरण सुचारू रूप से चल रहा है।

क्या है ‘नैनो यूरिया’ और ‘नैनो डीएपी’ लिक्विड?

पारंपरिक बोरियों के मुकाबले कितनी असरदार है यह नई तकनीक? वैज्ञानिकों के मुताबिक, 500 मिलीलीटर की एक बोतल नैनो यूरिया लिक्विड, पारंपरिक यूरिया के एक कट्टे (45 किलो) के बराबर काम करती है। जब इसका पौधों पर छिड़काव किया जाता है, तो यह सीधे पत्तियों के रंध्रों (स्टोमेटा) के जरिए सोख लिया जाता है। इससे मिट्टी प्रदूषित नहीं होती, नाइट्रोजन की उपयोग क्षमता 8% से बढ़कर 85% तक पहुंच जाती है, और किसानों का परिवहन खर्च पूरी तरह बच जाता है।

पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और भारतीय कृषि

स्वेज नहर और लाल सागर के तनाव से क्यों प्रभावित होती है खाद की कीमतें? भारत अपनी जरूरत का लगभग 100% पोटाश (MOP) और एक बड़ा हिस्सा डीएपी (DAP) जॉर्डन, मोरक्को, सऊदी अरब और इजरायल जैसे देशों से आयात करता है। लाल सागर (Red Sea) के समुद्री मार्ग में तनाव के चलते मालवाहक जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है। इससे समुद्री मालभाड़ा (Ocean Freight Rate) और जहाजों का बीमा प्रीमियम बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

जमीन के अनुसार ‘खाद की किस्तें’

  • सीमांत किसान (ढाई एकड़ तक): सोसायटियों के चक्कर काटने से बचाने के लिए इन्हें पूरी खाद एकमुश्त (एक ही बार में) मिलेगी।

  • लघु किसान (ढाई से पांच एकड़ तक): इन खाताधारकों को खाद का वितरण दो किश्तों में किया जाएगा।

  • बड़े किसान (पांच एकड़ से अधिक): इन्हें कृषि जरूरत के हिसाब से तीन चरणों में खाद जारी होगी।

जिलावार खाद भंडारण एवं वितरण की अद्यतन स्थिति (Data Table)

जिलाकुल निर्धारित लक्ष्य (मीट्रिक टन)गोदामों में वर्तमान उपलब्ध स्टॉक (मीट्रिक टन)किसानों को कुल वितरित मात्रा (मीट्रिक टन)मुख्य लाइव अपडेट / वर्तमान स्थिति
छत्तीसगढ़ (कुल)15.55 लाख9.29 लाखनिरंतर जारी1 जून तक रैक पॉइंट पर 6600 मीट्रिक टन यूरिया की नई खेप पहुंची।
बिलासपुर68,95041,56019,912कुल लक्ष्य का 60.28% भंडारण पूरा, यूरिया और डीएपी का पर्याप्त स्टॉक।
राजनांदगांव68,69042,99710,874 किसानों कोपिछले वर्ष की तुलना में इस अवधि में 43% अधिक खाद भंडार उपलब्ध।
बस्तर46,05029,719सोसायटियों में वितरितनिर्धारित लक्ष्य का लगभग 64% स्टॉक सहकारी समितियों के पास सुरक्षित।
गरियाबंदपर्याप्त स्टॉक17,818समितियों को प्रदायरासायनिक खादों के साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का अग्रिम स्टॉक।
धमतरी19,35815,0404,318किसानों की मांग के अनुसार यूरिया, एसएसपी और डीएपी का लाइव स्टॉक।
कोरबावर्तमान मांग अनुसारSTOCK2101.85 (अप्रैल-मई)मई महीने में वितरण की रफ्तार तेज होकर 1910 मीट्रिक टन तक पहुंची।
कोरिया12,150मॉनिटरिंग जारी6,196अनियमितता पर जिल्दा समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज।
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