सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीनी धोखाधड़ी और जालसाजी (Durg Property Fraud Case) का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रॉपर्टी बाजार के कड़े और कूटनीतिक ढर्रे को हिलाकर रख दिया है। ओडिशा के कटक से ऑपरेट करने वाले एक शातिर परिवार ने दुर्ग की एक महिला को अपने जाल में फंसाकर 40 लाख रुपये के मकान का सौदा किया और एडवांस के रूप में 22 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। पैसे डकारने के बाद जब रजिस्ट्री की बारी आई, तो आरोपियों ने असली ‘सस्पेंस’ खोला और मुकर गए। बाद में पता चला कि जिस मकान को वे अपना बताकर बेच रहे थे, उस पर पहले से ही कोर्ट का कड़ा विवाद चल रहा था।
इस अमानवीय विफलता के बाद जब पीड़िता को थाने से न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के कड़े आदेश पर मोहन नगर पुलिस ने कटक (ओडिशा) के तीन शातिर जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी का गैर-जमानती अपराध दर्ज कर आक्रामक विवेचना शुरू कर दी है।
22 लाख बयाना लेकर छिपाई कोर्ट की डिक्री
पूरा मामला दुर्ग के पॉश इलाके पद्मनाभपुर का है। पद्मनाभपुर निवासी पीड़िता अंजू अरोरा ने कूटनीतिक ठगी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट में परिवाद दायर किया था। शिकायत के अनुसार, कटक (ओडिशा) निवासी संतोषिनी साहनी उर्फ संतोषिनी मोहंती, देवजानी साहनी और संग्राम कुमार साहनी के नाम पर गृह निर्माण मंडल का पद्मनाभपुर स्थित मकान क्रमांक MIG-C/449 आवंटित है।
आरोपियों ने पूरी कड़ाई और सुनियोजित साजिश के तहत 24 अप्रैल 2023 को इस पूरी संपत्ति को 40 लाख रुपये में बेचने का सौदा अंजू अरोरा से किया। बकायदा इकरारनामा (एग्रीमेंट) निष्पादित कर पीड़िता से अलग-अलग बैंक खातों और चेक के माध्यम से 22 लाख रुपये बतौर बयाना राशि (एडवांस) कड़क ढर्रे से वसूल कर लिए। तय हुआ था कि संपत्ति का नामांतरण और फ्रीहोल्ड प्रक्रिया पूरी होने के 45 दिनों के भीतर रजिस्ट्री कराकर शेष राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन जैसे ही सारे सरकारी कस्टमाइज्ड दस्तावेज तैयार हुए, आरोपियों की नीयत डोल गई। पीड़िता बार-बार रजिस्ट्री का आग्रह करती रही, लेकिन आरोपी लगातार कूटनीतिक टालमटोल करते रहे।
आधे हिस्से पर था दूसरों का मालिकाना हक
जब पीड़िता ने अपने स्तर पर इस प्रॉपर्टी के ढर्रे की कड़ाई से पड़ताल की, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस मकान को कटक का यह परिवार अपना बता रहा था, उसे लेकर पहले से ही उनके परिवार का एक कड़ा विवाद न्यायालय में लंबित था। हद तो तब हो गई जब कोर्ट ने इस संपत्ति के आधे हिस्से पर अन्य पक्षकारों के स्वामित्व का निर्णय और डिक्री भी पारित कर दी थी।
“इस सबसे बड़े विधिक सस्पेंस और सच को पूरी तरह छिपाकर, आरोपियों ने खुद को पूरी संपत्ति का एकमात्र मालिक बताते हुए पीड़िता के साथ कड़ा विक्रय अनुबंध किया और 22 लाख रुपये हड़प लिए। इतना ही नहीं, शातिरों ने चालाकी दिखाते हुए संपत्ति का बकाया नगर निगम टैक्स और नामांतरण प्रक्रिया का करीब 1 लाख रुपये का खर्च भी पीड़िता की जेब से वहन करवा लिया और वह राशि भी वापस नहीं की।”
पुलिस खंगाल रही कटक के तार
अदालत ने जब शिकायत, बैंक ट्रांजैक्शन के पुख्ता दस्तावेजों और उपलब्ध कड़े तथ्यों का बारीकी से अवलोकन किया, तो इसे प्रथम दृष्टया एक गंभीर और सुनियोजित धोखाधड़ी का अपराध पाया। कोर्ट ने मोहन नगर पुलिस को तत्काल कड़ा एक्शन लेने का निर्देश दिया। अदालती डंडे के बाद मोहन नगर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (पूर्ववर्ती IPC की धारा 420) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। अब सबसे बड़ा पुलिसिया सस्पेंस और चुनौती यह है कि कटक में बैठे इन जालसाजों को दबोचने के लिए दुर्ग पुलिस की टीम ओडिशा में कितनी जल्दी आक्रामक दबिश देती है? बहरहाल, इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी करने वाले चाहे सात समंदर पार ही क्यों न बैठे हों, कानून के कड़े शिकंजे से बच नहीं सकते।




