सीजी भास्कर, 04 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने वाहन की नंबर प्लेट ढकने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल नंबर प्लेट छिपाना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा कृत्य मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसे बिना आवश्यक कानूनी आधार के आपराधिक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। (Vehicle Number Plate Law)
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धोखाधड़ी साबित करने के लिए जरूरी हैं ये तत्व : Vehicle Number Plate Law
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 420 लागू करने के लिए बेईमानी की नीयत, किसी व्यक्ति को धोखे से प्रेरित करना और उससे संपत्ति या आर्थिक नुकसान होना आवश्यक है। अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि वाहन की केवल पिछली नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि आगे की नंबर प्लेट पूरी तरह स्पष्ट थी। ऐसे में इसे पहचान छिपाने या धोखाधड़ी का प्रयास नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में धारा 420 के तहत कार्रवाई करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई
अदालत ने स्पष्ट किया कि नंबर प्लेट को ढकना मोटर वाहन अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन है, जिसके लिए जुर्माना या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, केवल इस आधार पर धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें एक व्यक्ति के खिलाफ नंबर प्लेट पर कवर होने के कारण आईपीसी की धारा 420 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी से संबंधित आरोपों को निरस्त करते हुए कानूनी प्रावधानों की सीमाओं को स्पष्ट किया।
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