सीजी भास्कर, 18 सितंबर : प्रयास विद्यालय, रायपुर में कक्षा 9वीं के छात्र को स्कूल से टीसी देकर बाहर किए जाने का मामला छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के संज्ञान में आया है। पालक के आवेदन में आरोप लगाया गया है कि छात्र को निष्कासन की कार्रवाई (Child Rights Commission) करते हुए टीसी जारी की गई। छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने का कथित आरोप भी सामने आया है। हालांकि, इस आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
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पालक ने उठाए सवाल
आवेदन में कहा गया है कि छात्र के पालक को समुचित जानकारी दिए बिना उसे कक्षा से बाहर कर टीसी प्रदान की गई। पालक ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की उचित जांच और कार्रवाई की मांग की है।
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आयोग ने लिया संज्ञान
आवेदन का अवलोकन करने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) और धारा 14 के तहत प्रकरण का संज्ञान लिया है।
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जांच के निर्देश
आयोग ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उनसे तथ्यात्मक और लिखित प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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टीसी निरस्त करने के निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने छात्र की टीसी निरस्त करने और उसकी पढ़ाई दोबारा जारी रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं। आयोग के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में छात्र की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
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सहायक आयुक्त से चर्चा
डॉ. वर्णिका शर्मा ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास से दूरभाष पर चर्चा भी की। उन्होंने मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। आयोग ने छात्र के शैक्षणिक हितों को प्राथमिकता देने को कहा है।
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21 सितंबर को सुनवाई
मामले की जांच के लिए प्रयास विद्यालय, रायपुर के प्राचार्य और अधीक्षक को आयोग की आपातकालीन खंडपीठ के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग कार्यालय में संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना होगा।
अपना पक्ष रखना होगा
प्राचार्य और अधीक्षक को मामले से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ अपना पक्ष भी आयोग के समक्ष रखना होगा। इसके आधार पर प्रकरण की आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा जारी रखने पर जोर
आयोग अध्यक्ष ने निर्देशित किया है कि प्रकरण के अंतिम निराकरण तक छात्र की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखी जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच की प्रक्रिया के दौरान छात्र के शैक्षणिक हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।
आरोप की पुष्टि नहीं
मामले में छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आयोग ने पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए हैं।
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दस्तावेजों की होगी जांच
आयोग के समक्ष विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों और पक्ष के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट होगी। जांच के बाद प्रकरण का अंतिम निराकरण किया जाएगा।
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