सीजी भास्कर, 18 अगस्त। Akshat Agrawal Murder मामले में करीब दो साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने बड़ा फैसला (Akshat Agrawal Murder) सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायालय के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने अक्षत अग्रवाल की हत्या के मामले में उसके पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के फैसले के बाद इस चर्चित हत्याकांड की सुनवाई पूरी हो गई।

अक्षत अग्रवाल की हत्या 21 अगस्त 2024 को अंबिकापुर से लगे डिगमा इलाके में कार के भीतर गोली मारकर की गई थी। मामले में पुलिस ने पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से हथियार और अन्य सामान बरामद किए गए थे।
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Akshat Agrawal Murder में 33 गवाहों के बयान Akshat Agrawal Murder
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटना के अगले ही दिन संजीव मंडल को हिरासत में लिया था। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपी का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया।
अदालत में चली सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों के अलावा मेडिकल एवं फॉरेंसिक अधिकारियों, अक्षत के परिजनों और दोस्तों समेत कुल 33 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
अदालत ने मामले में पेश किए गए परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना। जांच में घटना के समय अक्षत अग्रवाल और संजीव मंडल की मौके पर मौजूदगी की पुष्टि हुई थी।
तीन पिस्टल और 31 कारतूस हुए थे बरामद
पुलिस जांच के दौरान संजीव मंडल के कब्जे से तीन पिस्टल और 31 कारतूस बरामद किए गए थे। इसके अलावा 50 हजार रुपए नकद और अक्षत अग्रवाल की सोने की चेन, ब्रेसलेट व अंगूठी भी बरामद की गई थी।
मामले में बरामद हथियारों और अन्य साक्ष्यों को जांच का अहम हिस्सा बनाया गया। फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ गवाहों के बयान के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा।
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आरोपी ने पुलिस के सामने किया था अलग दावा
गिरफ्तारी के बाद संजीव मंडल ने पुलिस के सामने अलग कहानी बताई थी। आरोपी ने दावा किया था कि अक्षत अग्रवाल ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। उसके मुताबिक अक्षत हथियार लेकर आया था और उसने खुद को गोली मारने के लिए कहा था।
आरोपी ने यह भी दावा किया था कि पहली गोली अक्षत ने खुद चलाई थी, जिसके बाद उसने दो गोलियां और चलाईं। हालांकि, बाद में अदालत में संजीव मंडल अपने पुलिस बयान से मुकर गया और खुद को निर्दोष बताया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अक्षत अग्रवाल को तीनों गोलियां नजदीक से मारी गई थीं। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना।
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हत्या और आर्म्स एक्ट में सजा
अदालत ने संजीव मंडल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत पांच वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई।
करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले में अदालत ने हत्या और अवैध हथियार से जुड़े आरोपों को साबित मानते हुए आरोपी को सजा सुनाई। इस तरह अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को अब उम्रकैद की सजा काटनी होगी।
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