सीजी भास्कर, 03 अक्टूबर। भारतीय वायुसेना भविष्य की युद्धक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और नई तकनीकों पर ज्यादा जोर (Indian Air Force AI) दे रही है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, इसलिए वायुसेना को भी अपनी क्षमताओं में बदलाव करना जरूरी है।
उन्होंने आत्मनिर्भरता को भी अहम बताते हुए तेजस लड़ाकू विमान, प्रचंड हेलिकॉप्टर और अस्त्र मिसाइल जैसी स्वदेशी प्रणालियों का जिक्र किया।

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नए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में देरी पर चिंता Indian Air Force AI
एयर चीफ ने नए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में हो रही देरी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समय पर डिलीवरी नहीं होने से वायुसेना को नुकसान होता है। हालांकि, नए विमानों की खरीद से क्षमता में आई कमी को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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अलग ड्रोन फोर्स बनाने की योजना नहीं
अलग ड्रोन फोर्स बनाने के सवाल पर एपी सिंह ने कहा कि ड्रोन आधुनिक युद्ध क्षमता का हिस्सा हैं। वायुसेना लगातार ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन की संख्या बढ़ा रही है, लेकिन फिलहाल अलग ड्रोन फोर्स बनाने की योजना नहीं है।
एक साथ इस्तेमाल होंगे ड्रोन और हथियार
एयर चीफ के मुताबिक ड्रोन, मिसाइल और दूसरे हथियारों को अलग-अलग इस्तेमाल करने के बजाय सैन्य ढांचे में एक साथ जोड़कर इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसी दिशा में नई तकनीकों और AI के इस्तेमाल पर वायुसेना का फोकस बढ़ रहा है।
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