सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से आदिवासियों की आस्था और उनके पूर्वजों की स्मृतियों (Kondagaon Land Dispute Case) से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है। यहां माकड़ी क्षेत्र में वर्षों पुराने एक सार्वजनिक श्मशान घाट (मरघट) की जमीन पर अवैध कब्जे का एक ऐसा कूटनीतिक खेल खेला जा रहा था, जिससे पूरे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हो रही थीं। जिस जमीन पर समाज के लोग पिछले 80-90 वर्षों से अपने पूर्वजों के शव दफनाते आ रहे थे, वहां एक रसूखदार ने कड़ाई से मिट्टी पटवाकर अपनी फैक्ट्री खड़ी कर दी थी। इस पूरे भूमि विवाद का सस्पेंस तब खत्म हुआ जब सर्व आदिवासी समाज के तीखे तेवरों के आगे जिला प्रशासन को झुकना पड़ा और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन का सरकारी सीमांकन कराया गया।
दरअसल, पूरा विवाद (Kondagaon Land Dispute Case) मां संतोषी फ्यूल्स एचपी पेट्रोल पंप के ठीक पीछे स्थित आदिवासियों के पारंपरिक मरघट का है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज जिला कोंडागांव के बैनर तले जिला अध्यक्ष पनकूराम नेताम, उपाध्यक्ष विजय कुमार सोरी, करुणा कोर्राम और महिला प्रभाग की अध्यक्ष कमला नेताम सहित अन्य सामाजिक जनों ने 25 मई को एसडीएम को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा था। इस शिकायत (Kondagaon Land Dispute Case) में साफ तौर पर आरोप लगाया गया था कि माकड़ी निवासी प्रसाद साहू द्वारा आदिवासियों के पूर्वजों के मठों और मरघट की पवित्र जमीन पर जबरन मिट्टी पटवा दी गई है। इतना ही नहीं, आरोपी ने उस पूरी शासकीय जमीन का घेराव करके वहां ईंट बनाने वाली मशीन भी लगा दी थी, जिससे ग्रामीणों को अपने परिजनों के शव दफनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
मामले की संवेदनशीलता और समाज के आक्रामक रुख को देखते हुए जिला कलेक्टर ने तत्काल जांच के कड़े निर्देश जारी किए। इसके बाद तहसीलदार माकड़ी ने दोनों पक्षों को विधिवत नोटिस जारी किया। 30 मई को खुद तहसीलदार, आरआई, हल्का पटवारी और राजस्व कर्मचारियों की टीम भारी पुलिस बल को लेकर मौके पर पहुंची। आदिवासियों की भारी भीड़ और भारी तनाव के बीच मरघट की जमीन (Kondagaon Land Dispute Case) की सरकारी नापजोख यानी सीमांकन की कार्रवाई शुरू की गई।
जब कड़ाई से सीमांकन (Kondagaon Land Dispute Case) का कार्य पूरा हुआ, तो राजस्व विभाग की सरकारी रिपोर्ट में यह बड़ा सच सामने आया कि आदिवासियों की शिकायत बिल्कुल सही थी। अनावेदक बिरस प्रसाद साहू द्वारा पूर्वजों के सार्वजनिक श्मशान घाट की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा (Kondagaon Land Dispute Case) किया गया था। इस खुलासे के बाद मौके पर मौजूद सैकड़ों आदिवासियों में भारी आक्रोश देखा गया, लेकिन सामाजिक पदाधिकारियों की सूझबूझ से पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई।
जमीन पर अतिक्रमण (Kondagaon Land Dispute Case) की पुष्टि होते ही तहसीलदार माकड़ी ने मौके पर ही अनावेदक को 10 दिनों के भीतर श्मशान घाट से अपना पूरा तामझाम और अवैध कब्जा हटाने का सख्त मौखिक निर्देश दिया है। इधर, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष पनकूराम नेताम ने कड़े तेवर दिखाते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे उम्मीद करते हैं कि तहसीलदार 10 दिनों के भीतर इस अतिक्रमण (Kondagaon Land Dispute Case) को पूरी तरह साफ करवा देंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर मट्टी की इस जमीन को खाली नहीं कराया गया, तो समाज दोबारा वैधानिक और सामाजिक प्रक्रिया के तहत खुद उस अवैध निर्माण को ढहाने के लिए विवश होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केवल और केवल राजस्व प्रशासन की होगी।




