सीजी भास्कर, 03 जून : छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का ताबड़तोड़ एक्शन (CGPSC Recruitment Scam CBI) लगातार जारी है। बहुचर्चित ‘भारतमाला परियोजना’ के तहत हुए करोड़ों रुपये के भूमि अधिग्रहण घोटाले में ईडी ने आज सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी जेके ध्रुव के भिलाई स्थित निवास सहित तीन अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। तड़के करीब 6 बजे ईडी के अफसरों की टीम छह गाड़ियों में सवार होकर अफसर के घर धमक पड़ी, जिसके बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। फिलहाल जांच एजेंसी द्वारा घर के भीतर गहनता से दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की स्क्रूटनी की जा रही है।
गौरतलब है कि पूर्व आईएएस जेके ध्रुव पहले से ही छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक हैं और फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं। ईडी (CGPSC Recruitment Scam CBI) की इस ताजा और कड़क कार्रवाई को सीधे तौर पर भारतमाला रोड प्रोजेक्ट घोटाले में उनके वित्तीय कनेक्शन और संलिप्तता से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
जमीनों के टुकड़े कर ऐसे रचा गया 43 करोड़ का खेल
भारतमाला परियोजना (CGPSC Recruitment Scam CBI) के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर में मुआवजे के नाम पर भारी गड़बड़ी की गई है। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा को बताया जा रहा है, जिसने अपनी पहली पत्नी को तलाक देने के बाद तहसीलदार रविंदर कौर से विवाह किया था। ईडी को छानबीन के दौरान आरोपी खनूजा के ससुर हरमीत सिंह चावला के ठिकानों से इस महाघोटाले के वित्तीय लेनदेन और कई अत्यंत महत्वपूर्ण इनपुट्स हाथ लगे हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस जमीन अधिग्रहण मामले में करीब 43 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक का बड़ा घपला किया गया है। इसमें भू-माफिया, तत्कालीन एसडीएम (SDM) और पटवारियों के एक संगठित सिंडिकेट ने पुरानी तारीखों (बैक डेट) पर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार किए। इस सिंडिकेट ने अभनपुर बेल्ट के ग्राम नायकबांधा और उरला में एनएचएआई (NHAI) को चूना लगाने के लिए मुख्य जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर 159 नए खसरे बना डाले।
हद तो तब हो गई जब फर्जी तरीके से मुआवजा हड़पने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में 80 नए नाम रातों-रात चढ़ा दिए गए। इस जालसाजी के कारण जिस 559 मीटर जमीन का असली मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपये होना था, उसकी फर्जी कीमत बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा दी गई। इस मामले का खुलासा होने के बाद सरकार ने 78 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है। इस घोटाले में पहले ही तत्कालीन कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू सहित पांच अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है।
CGPSC घोटाले में भी रसूखदारों को नौकरी बांटने का आरोप
रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव जिस दूसरे सीजी-पीएससी (CGPSC) घोटाले में पहले से ही जेल काट रहे हैं, वह साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित हुई राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान मैरिट और पारदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर तत्कालीन राजनीतिक और प्रशासनिक रसूखदारों के बच्चों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी (DSP) जैसे उच्च पदों पर रेवड़ियों की तरह चुना गया।
सीबीआई (CBI) की जांच में खुलासा हुआ है कि पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग किया। सोनवानी की पत्नी के एनजीओ (NGO) को एक निजी कंपनी से सीएसआर (CSR) मद के तहत 45 लाख रुपये की रिश्वत दी गई, जिसके एवज में परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए गए। परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने अध्यक्ष के इशारे पर उद्योगपति श्रवण गोयल को पेपर उपलब्ध कराया, जिससे उनके बेटे-बहू का चयन सीधे डिप्टी कलेक्टर पद पर हो गया। इसी तरह सोनवानी ने अपने सगे भतीजों को भी डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी बनवा दिया था, जिसमें योग्य अभ्यर्थियों की पूरी तरह अनदेखी की गई।




