सीजी भास्कर, 04 जून : दुर्ग जिले में ड्रग्स मामले की जांच के दौरान रिश्वत मांगने (Durg Bribery Case) के गंभीर आरोप सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर कथित ऑडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) विजय अग्रवाल ने पुरानी भिलाई थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर देव लाल साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग अटैच कर दिया है। मामले ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
बताया जा रहा है कि पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में दर्ज एक एनडीपीएस एक्ट प्रकरण में गिरफ्तार महिला को छोड़ने के एवज में कथित रूप से 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। महिला की बेटी ने आरोप लगाया कि उसकी मां को राहत दिलाने के नाम पर पैसे मांगे गए। इतना ही नहीं, उसने यह भी दावा किया कि कुछ अन्य अधिकारियों और साइबर क्राइम से जुड़े लोगों द्वारा भी उससे 2 लाख रुपये की मांग की गई थी।
वायरल ऑडियो के बाद हुई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार पुरानी भिलाई थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 288/2026, एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष से पैसों की मांग किए जाने का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामला सामने आते ही पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लिया।
प्रारंभिक जांच में वायरल ऑडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में सामने आया कि सब-इंस्पेक्टर तुलसीराम साहू द्वारा कथित रूप से रिश्वत की मांग की गई, जबकि सब-इंस्पेक्टर देव लाल साहू पर भी सहयोग करने के आरोप लगे। विभागीय नियमों के उल्लंघन को देखते हुए दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।
“सीनियर अधिकारियों तक पैसे पहुंचाने” का भी आरोप
मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला की बेटी जसबीर ने दावा किया है कि उसके पास बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। उसके अनुसार बातचीत के दौरान यह भी कहा गया था कि मांगी गई राशि का कुछ हिस्सा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि जिस मोबाइल फोन के आधार पर कार्रवाई की गई, उससे जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी उसके पास मौजूद है।
तीन दिन में मांगी गई जांच रिपोर्ट
दुर्ग पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक को पूरे प्रकरण की प्रारंभिक जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस विभाग की साख पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। खासकर ऐसे मामलों में जहां कानून लागू कराने वाले अधिकारियों पर ही भ्रष्टाचार और रिश्वत मांगने के आरोप लगें, वहां पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।




