सीजी भास्कर, 05 जून : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर (Bihan Yojana Success Story) बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम अंबाधार की रहने वाली सरस्वती पैंकरा इसकी प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। पशुपालन को आजीविका का साधन बनाकर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
करुणा स्व-सहायता महिला समूह से जुड़ी सरस्वती पैंकरा एक साधारण किसान परिवार से हैं। Bihan Yojana के माध्यम से समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया और पशुपालन को रोजगार का माध्यम चुना। उनकी मेहनत और शासन की योजनाओं का लाभ आज उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है।
पशुपालन प्रोत्साहन योजना से मिली नई शुरुआत
राज्य शासन की पशुपालन प्रोत्साहन योजना के तहत सरस्वती पैंकरा को दो उन्नत नस्ल की गायें उपलब्ध कराई गईं। इन गायों की कुल कीमत लगभग 1.40 लाख रुपये थी, जिसमें से 93 हजार रुपये की राशि शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान की गई। इस सहायता ने उनके लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने का रास्ता आसान बना दिया।
गायों की देखभाल और आधुनिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने दूध उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। वर्तमान में उनकी गायें प्रतिदिन लगभग 14 से 15 लीटर दूध दे रही हैं, जिसे वे स्थानीय बाजार में बेचती हैं।
हर महीने 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय
दूध विक्रय से सरस्वती पैंकरा को प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये की आय हो रही है। इस अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान की है। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में उन्हें अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सहूलियत मिल रही है। सरस्वती बताती हैं कि पहले सीमित संसाधनों के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन था, लेकिन अब नियमित आय के कारण आर्थिक चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं।
Bihan Yojana से बदली जिंदगी
सरस्वती पैंकरा को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद आर्थिक गतिविधियों की जानकारी मिली। शासन से मिली दो उन्नत नस्ल की गायों के सहारे उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज प्रतिमाह करीब 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
Animal Husbandry Scheme ने दिया रोजगार का स्थायी साधन
93 हजार रुपये के सरकारी अनुदान ने पशुपालन व्यवसाय की शुरुआत आसान बनाई। नियमित दूध उत्पादन और स्थानीय बाजार में बिक्री के जरिए सरस्वती ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली है। सरस्वती पैंकरा का कहना है कि शासन की योजनाओं और स्व-सहायता समूह के सहयोग ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और पशुपालन से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, संसाधन और वित्तीय सहायता मिले तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।




