सीजी भास्कर, 06 जून : 8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के सरकारी कर्मचारियों (OPS Demand News ) में उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसी बीच Old Pension Scheme (OPS) को बहाल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा और सुनिश्चित पेंशन के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था सबसे बेहतर विकल्प है, जबकि विशेषज्ञ इसे वित्तीय रूप से बड़ी चुनौती मान रहे हैं।
कर्मचारियों का तर्क- OPS से मिलती है जीवनभर की सुरक्षा
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन के आधार पर निश्चित पेंशन मिलती है। इसके साथ महंगाई भत्ता बढ़ने पर पेंशन में भी बढ़ोतरी होती है। उनका मानना है कि इससे बुजुर्गावस्था में आर्थिक असुरक्षा की आशंका कम हो जाती है।
संगठनों का दावा है कि मौजूदा National Pension System (NPS) बाजार आधारित व्यवस्था है, जिसमें पेंशन की राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली रकम को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।
NPS से OPS में वापसी आसान नहीं
वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले करीब दो दशकों में एनपीएस के तहत कर्मचारियों और सरकार के अंशदान से 16.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कोष तैयार हो चुका है। यह राशि विभिन्न निवेश योजनाओं और वित्तीय संस्थानों में लगी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि देशभर में दोबारा ओपीएस (OPS Demand News ) लागू करने का निर्णय लिया जाता है तो सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। साथ ही निवेश बाजार और पेंशन फंड व्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
8वें वेतन आयोग पर टिकी लाखों कर्मचारियों की नजर
केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। आयोग की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
आयोग की सिफारिशों का सीधा असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनरों पर पड़ने वाला है। ऐसे में वेतन संशोधन के साथ-साथ पेंशन व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या फिर लागू होगी पुरानी पेंशन योजना?
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से पुरानी पेंशन योजना (OPS Demand News ) को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही मांग और कई राज्यों में ओपीएस को लेकर हुई राजनीतिक बहस ने इस मुद्दे को फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के आगामी फैसलों पर टिकी हुई है।



