सीजी भास्कर, 07 जून : छत्तीसगढ़ के शहरों (Chhattisgarh Urban Development Projects ) को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और बुनियादी अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा 834 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है, लेकिन करोड़ों रुपये की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं अब भी धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत अनेक विकास कार्य अभी शुरुआती चरणों में ही हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राज्य सरकार ने इन योजनाओं के माध्यम से शहरों में सड़क, जलापूर्ति, यातायात, तालाब सौंदर्यीकरण, बस टर्मिनल और अन्य नागरिक सुविधाओं को विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। हालांकि कई निकायों में स्वीकृत कार्यों की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
13 नगर निगमों में 26 बड़े विकास कार्य स्वीकृत
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत प्रदेश के 13 नगर निगम क्षेत्रों में 26 प्रमुख विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें सड़क चौड़ीकरण, जल आपूर्ति नेटवर्क विस्तार, शहरी सौंदर्यीकरण, आधुनिक बस स्टैंड, कॉरिडोर निर्माण और विभिन्न आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं।
राजधानी रायपुर सहित कई बड़े शहरों में इन परियोजनाओं को शहरों की नई पहचान और बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन स्वीकृति और बजट मिलने के बाद भी कई परियोजनाएं अभी तक कागजी प्रक्रियाओं और प्रारंभिक तैयारियों से आगे नहीं बढ़ पाई हैं।
रायपुर समेत कई शहरों में धीमी प्रगति
सूत्रों के अनुसार रायपुर में स्वीकृत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति अब भी संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। इसी तरह बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, धमतरी, अंबिकापुर और अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी कई विकास कार्य शुरुआती चरणों में हैं या सीमित प्रगति दर्ज कर पाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन न होने से नागरिकों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित होती हैं और परियोजनाओं की लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है।
शासन ने शुरू की जमीनी समीक्षा
विकास कार्यों की धीमी गति को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों ने नगरीय निकायों का दौरा शुरू कर दिया है।
नोडल अधिकारी नगर निगम आयुक्तों, इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर योजनाओं की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। कई परियोजनाओं का भौतिक निरीक्षण भी किया जा रहा है ताकि वास्तविक प्रगति का आकलन किया जा सके। अधिकारियों को यह भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि किन कारणों से परियोजनाओं में देरी हो रही है और उन्हें तेजी से पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
शहरों को आधुनिक पहचान देने का लक्ष्य
सरकार का उद्देश्य मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के माध्यम से शहरों में आधुनिक अधोसंरचना विकसित करना, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना, पेयजल सुविधाओं का विस्तार करना और सार्वजनिक स्थलों का उन्नयन करना है।
इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ शहरों की पहचान भी बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन अब परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
नियमित निरीक्षण और प्रगति रिपोर्ट पर रहेगा जोर
अधिकारियों का कहना है कि सभी लंबित और धीमी गति से चल रही परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। प्रगति रिपोर्ट के आधार पर संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। सरकार का मानना है कि समयबद्ध क्रियान्वयन और सतत निगरानी से ही करोड़ों रुपये की इन परियोजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच सकेगा।



