सीजी भास्कर, 11 जून। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22 से E30) पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस निर्णय से देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिलेगा और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। (E30 Petrol Excise Duty Exemption)
E20 के बाद अब E30 की ओर बढ़ा भारत : E30 Petrol Excise Duty Exemption
भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर चुका है। अब सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन फ्यूल ब्लेंड्स को केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर (Road and Infrastructure Cess) से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। E22 में 78 प्रतिशत पेट्रोल और 22 प्रतिशत इथेनॉल होगा, जबकि E30 में 70 प्रतिशत पेट्रोल और 30 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण रहेगा।
कच्चे तेल के संकट से मिलेगी राहत
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल का उपयोग बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल तेल आयात में कमी आएगी बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।
किसानों और उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ : E30 Petrol Excise Duty Exemption
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा कृषि क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। देश में इथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और अनाज आधारित डिस्टिलरी के माध्यम से किया जाता है। वर्तमान में देश की कुल इथेनॉल उत्पादन क्षमता का लगभग आधा हिस्सा ही उपयोग हो रहा है।उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की मांग बढ़ने से डिस्टिलरी उद्योग को गति मिलेगी और गन्ने तथा अन्य फसलों की खपत बढ़ेगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने की संभावना है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। इससे वायु प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का यह कदम आर्थिक लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BIS मानकों वाले फ्यूल पर ही मिलेगी छूट
सरकार ने स्पष्ट किया है कि टैक्स छूट केवल उन्हीं इथेनॉल मिश्रित ईंधनों पर लागू होगी जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 19850 मानकों का पालन करते हों। इसके अलावा पेट्रोल पर निर्धारित शुल्क और इथेनॉल पर जीएसटी का भुगतान किया जाना भी अनिवार्य होगा।
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