सीजी भास्कर, 14 जून : कांकेर जिले के चारामा विकासखंड में मनरेगा (MGNREGA Irregularity) के तहत स्वीकृत तालाब गहरीकरण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी मशीनों से काम कराया गया, जबकि मजदूरों के नाम पर मस्टररोल भरकर भुगतान निकाला गया। मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की गई है और जांच की मांग उठी है।
तालाब गहरीकरण कार्य में मशीनों के उपयोग का आरोप
जानकारी के अनुसार ग्राम गोटीटोला के आश्रित ग्राम चंदेली में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से तालाब गहरीकरण कार्य स्वीकृत किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थल पर मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई लोगों के नाम पर मजदूरी दर्ज कर भुगतान निकाला गया, जबकि उन्होंने कार्यस्थल पर कोई काम नहीं किया। इसे योजना के नियमों के विपरीत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
बिना काम किए खातों में पहुंची राशि!
ग्रामीणों और कुछ पंचों ने आरोप लगाया है कि उनके खातों में 12-12 हजार रुपये तक की राशि जमा हुई, जबकि उन्होंने एक दिन भी मजदूरी नहीं की। उनका कहना है कि उनके जॉब कार्ड में भी कार्य का कोई उल्लेख दर्ज नहीं है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार यदि बिना काम किए भुगतान जारी हुआ है, तो यह सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला हो सकता है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और राशि की वसूली की मांग की है।
सरपंच ने कहा- जांच में सामने आएगा सच
मामले में ग्राम पंचायत की ओर से कहा गया है कि कथित भुगतान की जानकारी नहीं है। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच टीम गठित, रिपोर्ट का इंतजार
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत होगा।





