सीजी भास्कर, 14 जून : डोंगरगढ़ में प्रस्तावित 8 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ (Parikrama Path Project) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। परियोजना के लिए 11 किसानों की निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रभावित किसानों ने विरोध दर्ज कराया है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में पर्याप्त शासकीय और राजस्व भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निजी जमीन खरीदने की आवश्यकता समझ से परे है और इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर किसानों ने जताई आपत्ति
कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार ग्राम छिरपानी के 11 भू-स्वामियों की भूमि परियोजना के लिए प्रस्तावित की गई है। प्रभावित किसानों का आरोप है कि उन्हें अब तक परियोजना का विस्तृत नक्शा नहीं दिखाया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी भूमि का कितना हिस्सा अधिग्रहित किया जाएगा।
किसानों का दावा है कि विभागीय अधिकारियों के बजाय कुछ निजी व्यक्तियों और कथित भूमि कारोबारियों द्वारा उनसे संपर्क किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह और बढ़ गया है।
सरकारी जमीन होने के बावजूद निजी भूमि खरीद पर सवाल
प्रभावित किसानों का कहना है कि मौजूदा मार्गों का उन्नयन कर तथा उपलब्ध शासकीय भूमि का उपयोग करते हुए परियोजना को पूरा किया जा सकता है। ऐसे में निजी भूमि अधिग्रहण और करोड़ों रुपये के मुआवजे की आवश्यकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
किसानों ने आशंका जताई है कि कहीं परियोजना की आड़ में कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने या जमीनों का मूल्य बढ़ाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। हालांकि इन आरोपों की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भू-माफिया की भूमिका की जांच की मांग
ग्रामीणों और प्रभावित किसानों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि परियोजना पूरी तरह जनहित में है तो प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों की शंकाएं दूर हो सकें।
किसानों का कहना है कि परियोजना के रूट चयन, तकनीकी आवश्यकता और निजी भूमि अधिग्रहण के औचित्य को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यही कारण है कि विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
जांच नहीं हुई तो हाईकोर्ट का रुख करेंगे किसान
प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों पर निष्पक्ष जांच नहीं की गई और परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। किसानों का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।
उनका मानना है कि समय रहते स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई तो मामला और गंभीर हो सकता है। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विकास परियोजना के नाम पर किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात तो नहीं हो रहा है।





