सीजी भास्कर, 13 जून। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर अब केवल युद्ध के मैदान तक सीमित (Ukraine Debt) नहीं रह गया है। लंबे समय से चल रही लड़ाई ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा दबाव बनाया है। बढ़ते रक्षा खर्च और लगातार वित्तीय जरूरतों के बीच देश की आर्थिक स्थिति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
युद्ध के कारण सरकारी खर्च बढ़ने और बाहरी सहायता पर निर्भरता बढ़ने से कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता बताया जा रहा है। इसी बीच सामने आए आंकड़ों ने यूक्रेन की वित्तीय चुनौतियों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
रूसी समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन के कुल सार्वजनिक कर्ज में भारी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार देश का कुल कर्ज बढ़कर 208.97 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 19 लाख करोड़ रुपये के बराबर बताया गया है।
युद्ध के बाद तेजी से बढ़ा कर्ज : Ukraine Debt
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022 में यूक्रेन का कुल कर्ज करीब 97.96 अरब डॉलर था। इसके बाद लगातार बढ़ते खर्च और आर्थिक दबाव के कारण इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। दावे के अनुसार चार वर्षों के भीतर कुल कर्ज में 111 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह कर्ज का स्तर पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो गया है।
विदेशी कर्ज में सबसे ज्यादा इजाफा
बताया गया है कि सबसे अधिक बढ़ोतरी विदेशी कर्ज में हुई है। यह आंकड़ा 57.2 अरब डॉलर से बढ़कर 162.73 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस राशि में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और सहयोगी देशों से प्राप्त आर्थिक सहायता तथा ऋण शामिल हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को लौटाया जाना है।
हर नागरिक पर बढ़ा बोझ
रिपोर्ट में जनसंख्या के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि देश के प्रत्येक नागरिक पर सरकारी कर्ज का भार काफी बढ़ चुका है। दावे के मुताबिक वर्तमान स्थिति में प्रति नागरिक औसतन लगभग साढ़े सात हजार डॉलर का कर्ज बैठता है, जो भारतीय मुद्रा में करीब सात लाख रुपये से अधिक माना जा रहा है।
कई वर्षों तक चुकानी पड़ सकती है देनदारी
यूक्रेन की आर्थिक चुनौतियों को लेकर यह भी अनुमान व्यक्त किया गया है कि मौजूदा कर्ज का भुगतान करने में लंबा समय लग सकता है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ सांसदों ने आशंका जताई है कि यदि परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो पूरे कर्ज का भुगतान करने में करीब 35 वर्ष तक का समय लग सकता है।
आर्थिक सहायता पर टिकी उम्मीदें
युद्ध के दौरान यूक्रेन लगातार सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक सहायता प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में कई सहायता और ऋण पैकेजों की भी घोषणा की गई है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल राहत देने वाली वित्तीय सहायता भविष्य में कर्ज के बोझ को भी बढ़ा (Ukraine Debt) सकती है। ऐसे में युद्ध समाप्त होने के बाद आर्थिक पुनर्निर्माण और कर्ज प्रबंधन यूक्रेन के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।
आगे की राह आसान नहीं
लगातार जारी संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक वित्त पर व्यापक असर डाला है। बढ़ते कर्ज और पुनर्निर्माण की जरूरतों के बीच आने वाले वर्षों में यूक्रेन को आर्थिक मोर्चे पर कई कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल वैश्विक स्तर पर भी यूक्रेन की आर्थिक स्थिति पर नजर (Ukraine Debt) बनी हुई है और यह देखा जा रहा है कि युद्ध के बीच देश अपनी वित्तीय चुनौतियों से किस तरह निपटता है।




