सीजी भास्कर, 18 जून : राजधानी रायपुर में वर्षों से अधूरा पड़ा स्काईवॉक प्रोजेक्ट (Raipur Skywalk Project) एक बार फिर सुर्खियों में है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पहले से खरीदे गए पुराने लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य उपकरणों की मदद से पूरा करने की तैयारी में जुट गया है। इन उपकरणों की स्थापना के लिए विभाग दो बार निविदा प्रक्रिया पूरी कर चुका है, लेकिन किसी भी एजेंसी ने रुचि नहीं दिखाई। अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए तीसरी बार टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है।
दो बार असफल रही निविदा प्रक्रिया, अब तीसरी बार होगी कोशिश
राजधानी के जीई रोड और शास्त्री चौक क्षेत्र में पैदल यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से वर्ष 2016-17 में स्काईवॉक परियोजना (Raipur Skywalk Project) की शुरुआत की गई थी। प्रारंभिक चरण में इसकी लागत 42.55 करोड़ रुपए निर्धारित की गई थी, लेकिन समय के साथ लागत बढ़कर करीब 77 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बाद वर्ष 2018 में यह परियोजना रोक दी गई थी।
अब विभाग पहले से खरीदे गए लिफ्ट और एस्केलेटर को स्थापित कर परियोजना को पूरा करने की योजना बना रहा है। इसके लिए 92 लाख रुपए की लागत से दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी भी कंपनी ने भागीदारी नहीं की। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि निर्धारित राशि कम होने के कारण एजेंसियां इस काम में रुचि नहीं दिखा रही हैं।
पुराने उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग छह वर्षों से उपयोग में नहीं आए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरणों की तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण अनिवार्य है। लंबे समय तक भंडारण में रखे जाने के कारण इनकी कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक पहले 12 स्थानों पर एस्केलेटर लगाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर आठ स्थानों तक सीमित किया गया है। वहीं अंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल के पास लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि मरीजों और आम नागरिकों को सुविधा मिल सके।
12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य, रखरखाव की भी बनेगी व्यवस्था
स्काईवॉक प्रोजेक्ट (Raipur Skywalk Project) को पूरा करने के लिए 37.75 करोड़ रुपए का नया कार्यादेश जारी किया गया है। विभाग ने 12 महीने के भीतर शेष निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, हालांकि अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से कुछ अतिरिक्त समय भी लग सकता है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार पुराने लिफ्ट और एस्केलेटर स्थापित किए जाने के बाद उनकी नियमित देखरेख और मरम्मत के लिए अलग से वार्षिक अनुरक्षण अनुबंध (एएमसी) किया जाएगा। विभाग का दावा है कि तीसरी निविदा प्रक्रिया सफल होते ही परियोजना के बाकी कार्यों में तेजी लाई जाएगी और लंबे समय से अधूरी पड़ी यह योजना आखिरकार धरातल पर पूरी हो सकेगी।
न्यूज़ बॉक्स : Raipur Skywalk Project
रायपुर का बहुप्रतीक्षित स्काईवॉक प्रोजेक्ट (Raipur Skywalk Project) फिर से शुरू होने की तैयारी में है। छह साल पुराने लिफ्ट और एस्केलेटर के सहारे परियोजना को पूरा करने की योजना बनाई गई है। दो बार टेंडर फेल होने के बाद अब तीसरी बार निविदा निकाली जाएगी। 37.75 करोड़ रुपए की लागत से शेष कार्य पूरा कर 12 माह के भीतर स्काईवॉक को जनता के लिए शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।





