बिलासपुर में व्यापारी से मारपीट के मामले में आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में एसएसपी के बदलने के बाद धारा 307 को हटा दिया गया और फिर कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया। अब ट्रायल से पहले कोर्ट ने धारा हटाने और मेडिकल रिपोर्ट से जुड़ी क्वेरी पर जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किया है।
मामला सिविल लाइन थाने से जुड़ा है। दरअसल, सिंधी कॉलोनी जरहाभाठा निवासी शंकरलाल दयालानी (49) की गोलबाजार में जनरल स्टोर की दुकान है। 28 जुलाई 2020 की रात करीब 9 बजे वे दवा लेने घर से सिंधी कॉलोनी जरहाभाठा स्थित मेडिकल दुकान जा रहे थे।
इसी दौरान गोदू चौक सिंधी कॉलोनी के पास मोतीलाल दयालानी मिला। उसने अपने खिलाफ कोर्ट में केस लगाने की बात कहते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर उसने शंकरलाल के साथ मारपीट की।
केस वापस लेने दी धमकी देकर मारपीट की
इसी दौरान वहां उसका भाई राम दयालानी, किशोर दयालानी (किशोर बूट हाउस) और आशीष दयालानी और अन्य शख्स भी पहुंच गए और सभी ने मिलकर शंकरलाल की पिटाई कर दी। आरोप है कि उन्होंने कोर्ट से केस वापस नहीं लेने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
बीच-बचाव के लिए बंटी किशनानी, नितेश गेमनानी और बाकी लोग आगे आए। मारपीट में शंकरलाल के हाथ, चेहरे और नाक के पास चोटें आईं। पीड़ित ने घटना की रिपोर्ट सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 294, 506, 323 और 34 के तहत केस दर्ज किया।
SSP के निर्देश में जोड़ी धारा 307
मारपीट में घायल शंकरलाल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अपोलो अस्पताल में इलाज चला। इलाज के दौरान उन्होंने मामले में हत्या के प्रयास (धारा 307) दर्ज नहीं किए जाने की शिकायत तत्कालीन एसएसपी प्रशांत अग्रवाल से की।
इस पर उन्होंने टीआई सुरेंद्र स्वर्णकार को मेडिकल क्वेरी कराने के निर्देश दिए। जांच के बाद करीब एक साल बाद पुलिस ने मामले में धारा 307 भी जोड़ दी।
बिना जांच और मेडिकल क्वेरी के हटाई धारा
इस बीच प्रशांत अग्रवाल का तबादला हो गया। उनकी जगह पारूल माथुर एसएसपी बनीं। इस दौरान टीआई भी बदल गया था। यहां पदस्थ निरीक्षक सनिप रात्रे के रिपोर्ट पर उन्होंने बिना जांच और क्वेरी के धारा 307 हटाने के आदेश दिए।
इसी दौरान आरोपियों को पकड़ने के बाद थाने से मुचलके पर छोड़ दिया गया।
अब कोर्ट से बार-बार नोटिस, जवाब नहीं दे पा रही पुलिस
बताया जा रहा है कि पुलिस ने धारा 307 हटाकर कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। अब मामले में ट्रॉयल शुरू होना है। लिहाजा, कोर्ट से सिविल लाइन थाने में बार-बार नोटिस भेजकर हत्या के प्रयास की धारा 307 हटाने का कारण और मेडिकल क्वेरी रिपोर्ट पेश करने कहा जा रहा है, जिसका जवाब पुलिस नहीं दे रही है।
मामले में सिविल लाइन टीआई किशोर केंवट ने कहा कि यह मेरे समय का केस नहीं है, इसलिए डायरी की जानकारी लेने और कोर्ट का नोटिस देखने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है।





