सीजी भास्कर, 19 जून : दंतेवाड़ा जिला अस्पताल से मानवता, समर्पण और चिकित्सकीय दक्षता की एक प्रेरणादायक (Newborn Life Saved Dantewada) कहानी सामने आई है। जन्म के तुरंत बाद गंभीर हालत में पहुंची एक नवजात बच्ची ने सात दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन डॉक्टरों और एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) की अथक मेहनत ने आखिरकार उसे नया जीवन दे दिया। यह सफलता न केवल जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को दर्शाती है, बल्कि चिकित्सकों की कर्तव्यनिष्ठा और टीमवर्क की भी मिसाल बन गई है।
जन्म के बाद बिगड़ी हालत, हर पल बढ़ रहा था खतरा
गीदम विकासखंड के पदमेटा स्कूलपारा निवासी मंजू अलामी ने 10 मई को एक बच्ची को जन्म दिया। परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद नवजात की तबीयत अचानक गंभीर हो गई। बच्ची को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही थी, शरीर में शुगर का स्तर लगातार गिर रहा था और उसे बार-बार दौरे पड़ रहे थे। स्थिति इतनी नाजुक थी कि उसे किसी बड़े अस्पताल रेफर करना भी जोखिम भरा माना गया।
डॉक्टरों ने स्वीकार की चुनौती
गंभीर परिस्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल दंतेवाड़ा के शिशु रोग विशेषज्ञों ने तत्काल निर्णय लेते हुए बच्ची को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती किया। सीमित संसाधनों के बावजूद चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के बल पर इलाज शुरू किया।
सात दिन वेंटिलेटर पर चली जिंदगी की जंग
नवजात को लगातार सात दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इस दौरान डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने चौबीसों घंटे उसकी निगरानी की। बच्ची की हर सांस, हर धड़कन और स्वास्थ्य संकेतों पर लगातार नजर रखी गई। उपचार के दौरान चिकित्सकीय टीम ने धैर्य, समर्पण और कुशल प्रबंधन का परिचय दिया।
एक महीने के इलाज के बाद मिली नई जिंदगी
लगातार प्रयासों का परिणाम सात दिन बाद दिखाई देने लगा, जब बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ और उसे वेंटिलेटर से हटाया गया। इसके बाद भी चिकित्सकों ने उसे विशेष निगरानी में रखा। लगभग एक महीने तक चले उपचार और देखभाल के बाद 13 जून को बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके ने इस सफलता को जिला चिकित्सालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर स्वस्थ करना जिले में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय शिशु रोग विशेषज्ञों, एसएनसीयू टीम और पूरे स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता को दिया।
ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा भरोसा
दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ जिले में इस तरह का सफल उपचार यह साबित करता है कि अब ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। इस सफलता ने न केवल एक परिवार को खुशियां लौटाई हैं, बल्कि जिले के लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत किया है।





