सीजी भास्कर, 20 जून : बालोद जिले के जामड़ीपाट (तुएगोंदी) क्षेत्र में आयोजित होने वाली पारंपरिक देव जात्रा (Jamadipat Tension) से पहले माहौल तनावपूर्ण हो गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए आसपास के 20 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
जानकारी के अनुसार सर्व आदिवासी समाज के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर तुएगोंदी, केरी जुंगेरा और बड़े जुंगेरा गांवों के ग्रामीण अलग-अलग मत रखते हैं, जिसके चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
चार साल पुरानी घटना के बाद प्रशासन सतर्क
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार करीब चार वर्ष पूर्व इसी क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पथराव की घटना हुई थी, जिसके कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई थी। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
शुक्रवार को क्षेत्र में 500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी, जबकि आयोजन के दिन अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार क्षेत्र का दौरा कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
बलि की आशंका पर ग्रामीणों का विरोध
पाटेश्वर धाम के समीप स्थित बड़े जुंगेरा गांव में कथित रूप से बलि दिए जाने की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और कुछ समय के लिए चक्काजाम भी किया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर स्थिति को शांत कराया।
अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
जल स्रोत और भूमि को लेकर विवाद
सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि जिस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया है, वह वन क्षेत्र की भूमि है। समाज का कहना है कि उनकी मुख्य आपत्ति मंदिर निर्माण को लेकर नहीं, बल्कि ‘जल कैना’ नामक प्राकृतिक जल स्रोत के स्वरूप में किए जा रहे बदलाव को लेकर है।
समाज के पदाधिकारियों के अनुसार यह जल स्रोत लंबे समय से आदिवासी समुदाय की आस्था, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक पूजा-पद्धति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उनका आरोप है कि प्राकृतिक जल स्रोत को पाटकर उसका सीमेंटीकरण किया जा रहा है तथा आसपास किए जा रहे निर्माण कार्यों से उसका मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
मूर्ति स्थापना को लेकर भी उठे सवाल
आदिवासी समाज के नेताओं का कहना है कि उनका समुदाय प्रकृति पूजक है और जंगल, पहाड़, नदी तथा प्राकृतिक स्थलों को ही देवस्थल के रूप में मान्यता देता है। समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि जामड़ीपाट स्थित पाट बाबा स्थल पर स्थापित मूर्ति की पहचान और स्थापना प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
समाज ने इसे अपनी पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने क्षेत्र के लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों से संवाद किया जा रहा है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।





