सीजी भास्कर, 22 जून : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और सुदूर वनांचल (Bamboo Tree Guard)जिले सुकमा में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद खूबसूरत और अनोखा नवाचार किया गया है। सुकमा जिले के तोंगपाल में स्थानीय संसाधनों (बांस) के सही उपयोग और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘बांस ट्री-गार्ड’ निर्माण का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल से जहाँ एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पर्यावरण को भी सहेजा जा सकेगा।
कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का सीधा उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।
14 समूहों की 53 महिलाओं को दी गई ट्रेनिंग
तोंगपाल में आयोजित इस विशेष आजीविका प्रशिक्षण में क्षेत्र के 14 अलग-अलग महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) की 53 महिलाओं ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों की देखरेख में महिलाओं को बांस से ट्री-गार्ड बनाने की आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और उसकी मजबूती (गुणवत्ता) से जुड़े सभी महत्वपूर्ण गुर सिखाए गए। ट्रेनिंग के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध बांस का उपयोग कर बेहद कम लागत में मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक ट्री-गार्ड तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।
हाईवे और सार्वजनिक स्थलों पर पौधों को मिलेगी सुरक्षा
स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले ये बांस के ट्री-गार्ड पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली (पर्यावरण अनुकूल) होंगे। इन ट्री-गार्डों का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के किनारे लगाए जा रहे पौधों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा।
इसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों और सरकारी पौधारोपण अभियानों में भी ये ट्री-गार्ड लगाए जाएंगे ताकि रोपे गए पौधों को मवेशियों (पशुओं) और अन्य संभावित बाहरी नुकसान से बचाया जा सके। इससे क्षेत्र में हरित आवरण (ग्रीन कवर) बढ़ाने के प्रयासों को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था चमकेगी
राज्य और केंद्र सरकार के ‘लखपति दीदी’ अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने में यह योजना एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। मानसून के इस मौसम में वृक्षारोपण के कारण ट्री-गार्डों की मांग बहुत अधिक होती है। ऐसे में इन ईको-फ्रेंडली ट्री-गार्डों की बिक्री से होने वाली आमदनी सीधे इन महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचेगी।
अतिरिक्त रोजगार और आय का यह नया जरिया महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, जिससे ग्रामीण समाज में उनकी आर्थिक और सामाजिक भागीदारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी।





