सीजी भास्कर, 24 जून। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी व्यवस्था इन दिनों बदलाव के दौर से गुजर (Hamar Lab) रही है। मरीजों को अस्पतालों में मुफ्त और आधुनिक जांच सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रयोगशालाओं को लेकर नई प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस बदलाव के बाद कई जिलों में पुरानी व्यवस्था समाप्त होने लगी है, जिससे स्वास्थ्य तंत्र में चर्चा तेज हो गई है।
अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी इस बदलाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर नई व्यवस्था को बेहतर सेवाओं की दिशा में कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पहले से स्थापित संसाधनों के उपयोग को लेकर भी बहस छिड़ गई है।
चार जिलों में बंद हुईं लैब Hamar Lab
स्वास्थ्य विभाग ने जांच सेवाओं को नई प्रणाली के तहत संचालित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत रायपुर, मुंगेली, धमतरी और कांकेर जिले की हमर लैब को बंद कर दिया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से यही व्यवस्था लागू की जाएगी और जांच सेवाएं निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित होंगी।
करोड़ों की मशीनें हुईं निष्क्रिय
हमर लैब योजना के तहत पिछले वर्षों में आधुनिक जांच उपकरण और मशीनें खरीदी गई थीं। इन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे ताकि सरकारी अस्पतालों में बेहतर जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
अब लैब बंद होने के बाद इन मशीनों को अस्पताल परिसरों में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर जिला अस्पताल में ही लगभग 50 लाख रुपये की मशीनें स्थापित थीं। वहीं चार जिलों में बंद हुई लैबों के उपकरणों की अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है।
कई जगह प्रभावित हुई जांच व्यवस्था
नई व्यवस्था लागू होने के दौरान कई जिलों से जांच सेवाओं में दिक्कतों की जानकारी भी सामने (Hamar Lab) आई है। कुछ स्थानों पर मरीजों को रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है, जबकि कुछ अस्पतालों में आवश्यक जांच सुविधाएं सीमित होने की शिकायतें मिली हैं।
धमतरी में रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। वहीं जांजगीर चांपा सहित कुछ क्षेत्रों में मरीजों को रिपोर्ट के लिए अपेक्षा से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। कई अस्पतालों में पुरानी मशीनें अलग रख दी गई हैं और नई व्यवस्था के पूर्ण रूप से शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताई वजह
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पूर्व व्यवस्था में रिएजेंट और केमिकल की उपलब्धता समय समय पर प्रभावित होने से जांच सेवाओं पर असर पड़ता था। अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली में मरीजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सभी जांचों का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा और निजी एजेंसी अपनी मशीनों तथा तकनीकी संसाधनों के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
ऑनलाइन रिपोर्टिंग पर रहेगा जोर
विभाग का दावा है कि नई एजेंसी आधुनिक तकनीक के साथ ऑनलाइन रिपोर्टिंग और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था उपलब्ध (Hamar Lab) कराएगी। इससे जांच सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और प्रदेश के अधिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक नई व्यवस्था लागू होने के बाद जांच प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित तथा सुलभ बनाने का प्रयास किया जाएगा।





