सरगुजा राजपरिवार के सदस्य विंधेश्वर शरण सिंहदेव ने बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद पारंपरिक व्यवसाय के बजाय खेती को अपना करियर चुना। उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय यूएस सिंहदेव की कृषि विरासत को आगे बढ़ाते हुए अंबिकापुर के पास सरगवां में 40 एकड़ जमीन पर जैविक खेती का मॉडल तैयार किया है। उनके फार्म में सुगंधित धान, हरी सब्जियां, अंजीर और कई तरह के फलों की खेती की जा रही है।
विंधेश्वर खेती में पूरी तरह जैविक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। रासायनिक खादों से दूरी बनाकर जैविक खाद का उपयोग किया जाता है। इससे खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। उनके खेतों में तैयार होने वाले स्थानीय सुगंधित चावल की मांग अब सरगुजा के अलावा दिल्ली और देश के अन्य शहरों तक पहुंच रही है।
जैविक खेती के साथ डेयरी का मॉडल
विंधेश्वर ने खेती के साथ अपने फार्म में डेयरी भी स्थापित की है। यहां से बड़ी मात्रा में दूध का उत्पादन किया जाता है। डेयरी से निकलने वाले गोबर का भी उपयोग किया जाता है। गोबर से बायोगैस तैयार करने के साथ जैविक खाद बनाई जाती है, जिसका इस्तेमाल खेतों में किया जाता है। इस तरह खेती और डेयरी को एक-दूसरे से जोड़कर एकीकृत कृषि मॉडल तैयार किया गया है।
60 से 70 लोगों को मिल रहा रोजगार
इस फार्म के जरिए स्थानीय स्तर पर करीब 60 से 70 लोगों को नियमित रोजगार भी मिल रहा है। विंधेश्वर खुद जैविक खेती करने के साथ आसपास के किसानों को भी ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और जैविक तरीकों के साथ खेती को अपनाकर युवा इसे बेहतर रोजगार और व्यवसाय का माध्यम बना सकते हैं। उनका यह मॉडल खेती, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार को एक साथ जोड़ने की दिशा में उदाहरण बन रहा है।



