सीजी भास्कर. 24 जून। भारत और रूस के बीच रिश्तों को नई मजबूती देने वाली एक अहम पहल सामने (Judicial Cooperation) आई है। इस बार सहयोग का दायरा न्यायिक क्षेत्र तक पहुंचा है, जहां दोनों देशों की सर्वोच्च संस्थाओं ने मिलकर एक नई शुरुआत की है। कानूनी और न्यायिक जगत में इस कदम को लंबे समय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में अदालतों के सामने आने वाली चुनौतियां भी बदल रही हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के अनुभवों को साझा करना और आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाना न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इसी सोच के साथ दोनों देशों ने सहयोग का नया रास्ता चुना है।
सर्वोच्च न्यायालयों के बीच पहली बार समझौता Judicial Cooperation
भारत और रूस के सर्वोच्च न्यायालयों के बीच पहली बार एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक सहयोग को मजबूत करना, अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाना और आधुनिक व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करना है।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा नया आधार
समझौते के तहत दोनों देशों की न्यायिक संस्थाएं विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगी। इसमें न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़े अनुभव साझा करना, संस्थागत सहयोग बढ़ाना और बेहतर कार्यप्रणाली विकसित करने पर जोर रहेगा।
तकनीक के उपयोग पर रहेगा विशेष ध्यान
बैठक के दौरान न्यायिक क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग पर भी चर्चा हुई। अदालतों में डिजिटल प्रणालियों को मजबूत बनाने और तकनीक आधारित सेवाओं को आगे बढ़ाने पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई।
डिजिटलीकरण के प्रयासों पर हुई चर्चा
ई फाइलिंग, ऑनलाइन सुनवाई, अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद और वर्चुअल न्यायिक सहायता जैसी व्यवस्थाओं को न्याय तक आसान पहुंच के लिए महत्वपूर्ण बताया (Judicial Cooperation) गया। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया गया।
तीन क्षेत्रों में होगा प्रमुख सहयोग
समझौते के अनुसार न्यायिक अनुभवों का आदान प्रदान, अदालतों में सूचना प्रौद्योगिकी का विस्तार और न्यायिक अधिकारियों तथा कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों की न्यायिक प्रणालियों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा (Judicial Cooperation) मिलेगी।





