राजधानी में आग, हार्ट अटैक या किसी अन्य आपात स्थिति के दौरान राहत और बचाव कार्य बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। शहर के विभिन्न वार्डों के सर्वे में 310 से अधिक ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां संकरी गलियों और तंग रास्तों के कारण एंबुलेंस व दमकल वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते। ऐसे हालात में मरीजों को स्ट्रेचर के जरिए मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, जबकि आग लगने पर दूर से पाइपलाइन बिछाकर आग बुझाने का प्रयास किया जाता है।
हालिया अग्निकांडों के बाद प्रशासन ने राजधानी के ऐसे संवेदनशील इलाकों की मैपिंग कराने का निर्णय लिया है। पुलिस और संबंधित विभाग उन क्षेत्रों का सर्वे करेंगे, जहां संकरी गलियां, घनी आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण आपातकालीन सेवाओं के संचालन में बाधा आती है। पुरानी बस्ती, गोलबाजार, मौदहापारा, रेलवे स्टेशन रोड और बांसटाल-शास्त्री मार्केट जैसे क्षेत्रों में कई जगह चारपहिया वाहनों का प्रवेश तक संभव नहीं है।
शहर में कई होटल, लॉज, कॉम्प्लेक्स और व्यावसायिक भवन ऐसे हैं, जहां फायर फाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और पर्याप्त पहुंच मार्ग का अभाव है। पूर्व में हुई आग की घटनाओं ने भी इस समस्या को उजागर किया है, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज कर दी है।
पुलिस कमिश्नरी के निर्देश पर सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन और नगर निगम को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई, बिजली के तारों को व्यवस्थित करने तथा तंग गलियों के लिए छोटे दमकल वाहन और बाइक एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए कम से कम 6 मीटर (करीब 20 फीट) चौड़ा मार्ग आवश्यक है। ऊंची इमारतों वाले क्षेत्रों में इससे अधिक चौड़ाई और पर्याप्त ऊंचाई का क्लियरेंस भी अनिवार्य माना गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य बिना बाधा के संचालित किए जा सकें।



