सीजी भास्कर, 30 जून। झारखंड हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील और मानवीय फैसले में बोकारो जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के संविदा चपरासी रंजीत कुमार हिमांशु की बर्खास्तगी को अवैध ठहराते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने प्रशासनिक कार्रवाई को असंगत और अन्यायपूर्ण बताते हुए रंजीत को 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का भी निर्देश दिया है। (Tea and Biscuit Dismissal Case)
17 वर्षों की सेवा के बाद हुई थी बर्खास्तगी : Tea and Biscuit Dismissal Case
रंजीत कुमार हिमांशु की नियुक्ति 31 दिसंबर 2005 को डीआरडीए, बोकारो में संविदा चपरासी के रूप में हुई थी। करीब 17 वर्षों तक सेवा देने के बाद मार्च 2022 में उन्हें एक अस्पष्ट नोटिस जारी किया गया। बाद में यह सामने आया कि उन पर कार्यालय से चायपत्ती और बिस्कुट घर ले जाने का आरोप लगाया गया था।
मामूली आरोप पर चली गई नौकरी
आरोपों के आधार पर मई 2022 में प्रशासन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। रंजीत ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने कहा- यह कार्रवाई न्यायसंगत नहीं
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोप की प्रकृति और दी गई सजा के बीच संतुलन नहीं है। अदालत ने माना कि मामूली आरोप के आधार पर किसी कर्मचारी की आजीविका छीन लेना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
बहाली और 50 प्रतिशत बकाया वेतन का आदेश : Tea and Biscuit Dismissal Case
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि रंजीत कुमार हिमांशु को 1 जुलाई 2026 तक हर हाल में सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही पिछले चार वर्षों का 50 प्रतिशत बकाया वेतन 31 जुलाई 2026 तक भुगतान किया जाए। अदालत ने कहा कि शेष 50 प्रतिशत वेतन की कटौती ही कथित गलती के लिए पर्याप्त दंड मानी जाएगी।
डीसी और डीडीसी को व्यक्तिगत जिम्मेदारी
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बोकारो के उपायुक्त (डीसी) और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को आदेश के अनुपालन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि बहाली संबंधी अनुपालन रिपोर्ट 10 जुलाई 2026 तक तथा वेतन भुगतान संबंधी शपथ पत्र 10 अगस्त 2026 तक अदालत में दाखिल किया जाए।



