सीजी भास्कर, 30 जून। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में करोड़ों रुपये के कथित लोहा चोरी मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सीआईएसएफ की जांच के अनुसार चोरी सुनियोजित तरीके से की जाती थी। ट्रकों की तौल होने के बाद उन्हें सीधे प्लांट से बाहर भेजने के बजाय ब्रेकडाउन का बहाना बनाकर रोक लिया जाता था। इसके बाद ट्रकों को ऐसे मार्ग से ले जाया जाता था, जहां न तो सीआईएसएफ के जवान तैनात रहते थे और न ही सीसीटीवी कैमरों की निगरानी थी। इसी स्थान पर ट्रकों में चोरी का लोहा लोड किया जाता था और फिर उन्हें सीधे एक्जिट गेट से बाहर निकाल दिया जाता था। (Bhilai Steel Plant Iron Theft)
जांच अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों को प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की पूरी जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रकों में पहले फ्लू या डस्ट लोड की जाती थी, जिसकी तौल निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती थी। तौल के बाद ट्रकों को बाहर निकलना चाहिए था, लेकिन उन्हें तकनीकी खराबी या अन्य कारणों का हवाला देकर रोक लिया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रकों को पार्किंग से एसएमएस-3 क्षेत्र में ले जाया जाता था, जहां कथित रूप से संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत से चोरी का लोहा (Bhilai Steel Plant Iron Theft) लोड किया जाता था। चूंकि ट्रकों की तौल पहले ही हो चुकी होती थी, इसलिए दोबारा वजन नहीं कराया जाता था और अतिरिक्त लोहा आसानी से प्लांट से बाहर निकाल लिया जाता था।
सीआईएसएफ की जांच अंतिम चरण में है और मामले (Bhilai Steel Plant Iron Theft) में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों और संभावित मिलीभगत के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं।



