सीजी भास्कर, 02 जुलाई। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana), गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra), गुरु मंत्र, शांति मंत्र और भोजन मंत्र के अनिवार्य वाचन को लेकर चल रहे विवाद पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सरकारी स्कूलों में वर्तमान व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को दी गई थी चुनौती
दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) ने प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान सरस्वती वंदना और विभिन्न वैदिक मंत्रों के वाचन को अनिवार्य किया था। इस आदेश को कुछ याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक घोषित करने और तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की थी।
संविधान के कई अनुच्छेदों का दिया गया था हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि राज्य द्वारा पूर्ण रूप से वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक अनुष्ठान कराना अनुच्छेद 28 (Article 28) की भावना के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया कि यह आदेश अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (गरिमामय जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि विद्यालय वैज्ञानिक सोच और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के केंद्र होने चाहिए, इसलिए किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों का अनिवार्य वाचन उचित नहीं है।
हाई कोर्ट ने सभी दलीलें कीं खारिज
सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने याचिकाकर्ताओं की सभी दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र, गुरु मंत्र, शांति मंत्र और भोजन मंत्र का वाचन पहले की तरह जारी रहेगा।
सरकार की नीति को मिली कानूनी मजबूती
हाई कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार की उस नीति को कानूनी मजबूती मिली है, जिसके तहत विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक, नैतिक एवं अनुशासनात्मक मूल्यों को विकसित करने के उद्देश्य से प्रार्थना सभा में इन मंत्रों का वाचन कराया जा रहा है। फैसले के बाद प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में वर्तमान व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।



