सीजी भास्कर, 03 जुलाई : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध (Narco Test), (Polygraph Test), ब्रेन मैपिंग या अन्य वैज्ञानिक जांच तकनीकों से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी किसी भी जांच से पहले संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र, स्वैच्छिक और पूरी जानकारी के साथ दी गई सहमति अनिवार्य होगी।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रायगढ़ जिले के एक हत्या प्रकरण में पुलिस प्रताड़ना की शिकायत पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए उनके (Narco Test), (Polygraph Test), ब्रेन मैपिंग तथा अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों पर रोक लगा दी। साथ ही जांच एजेंसियों को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने की हिदायत भी दी।
जानिए क्या है पूरा मामला?
मामला रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र का है। यहां हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 238(A) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर ग्राम बेहरापाली निवासी किसान लक्ष्मीनारायण पटेल और ग्राम महापल्ली निवासी अर्धना भगत को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें लगातार कई दिनों तक थाने बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करती रही।
18 दिनों तक लगातार थाने बुलाने का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद है। 16 जून 2026 की जांच रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया था।
इसके बावजूद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत विधिवत नोटिस जारी किए बिना उन्हें लगातार 18 दिनों तक थाने बुलाया, घंटों बैठाए रखा और मानसिक दबाव बनाया। याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस ने दबाव डालकर सुपुर्दनामा पर हस्ताक्षर कराए और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए।
(Narco Test) और ब्रेन मैपिंग के लिए भी बनाया दबाव
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि पुलिस ने बिना न्यायिक अनुमति और बिना उनकी सहमति के ब्रेन मैपिंग, (Polygraph Test) और (Narco Test) कराने के लिए 20 जून को नोटिस जारी किया। नोटिस में उन्हें 22 और 23 जून 2026 को रायपुर में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक जांच पर लगाई रोक
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध (Narco Test), (Polygraph Test), ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) या किसी अन्य वैज्ञानिक जांच तकनीक से नहीं गुजारा जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि यदि जांच एजेंसी ऐसे किसी परीक्षण की आवश्यकता महसूस करती है, तो पहले संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र, स्पष्ट और पूरी जानकारी के साथ दी गई सहमति लेना अनिवार्य होगा। बिना सहमति ऐसी कोई भी जांच संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जाएगी।
पुलिस को भी दी सख्त नसीहत
हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि पूछताछ और जांच के दौरान कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाए। केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को लगातार थाने बुलाकर मानसिक दबाव बनाना या वैज्ञानिक जांच के लिए बाध्य करना स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना होगा।



