सीजी भास्कर, 05 जुलाई : बस्तर के कैका-चेरबहार क्षेत्र में एक हिंसक वन्यजीव द्वारा गाय का शिकार किए जाने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। कैका-चेरबहार वन्यजीव हमला (Kaika Cherbahar Wildlife Attack) की इस घटना के बाद ग्रामीणों के बीच बाघ या तेंदुए की मौजूदगी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, वन विभाग ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार करते हुए कहा है कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही हमलावर वन्यजीव की पुष्टि की जाएगी।
गाय का शव मिलने से फैली दहशत
जानकारी के अनुसार, भूमकाल सिरहा के घर के पास रविवार सुबह ग्रामीणों को एक गाय मृत अवस्था में मिली। घटनास्थल पर गाय के शव को खेत की ओर घसीटकर ले जाने के स्पष्ट निशान भी पाए गए। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर पंजों के निशानों के आधार पर जांच शुरू कर दी। कैका-चेरबहार वन्यजीव हमला (Kaika Cherbahar Wildlife Attack) के बाद आसपास के गांवों में भी लोगों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।
रात में सुनाई दी थी गाय के रंभाने की आवाज
ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार रात करीब 9 बजे खेत की ओर से गाय के रंभाने की आवाज सुनाई दी थी। कुछ देर बाद आवाज अचानक बंद हो गई। सुबह जब ग्रामीणों ने तलाश शुरू की तो गाय का शव मिला। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर कई बार चर्चाएं हो चुकी हैं। इसी वजह से कैका-चेरबहार वन्यजीव हमला (Kaika Cherbahar Wildlife Attack) ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
वन विभाग को मिले बड़े पंजों के निशान
वन विभाग के अधिकारियों को घटनास्थल पर बड़े आकार के पंजों के कई निशान मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिकार का तरीका किसी बड़े हिंसक वन्यजीव की ओर संकेत करता है, लेकिन यह बाघ (Tiger) है या तेंदुआ (Leopard), इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं की जा सकती। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा कि हमला किस वन्यजीव ने किया।
कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने कैका-चेरबहार वन्यजीव हमला (Kaika Cherbahar Wildlife Attack) के बाद क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाने और जंगल से लगे इलाकों में निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे रात के समय अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाएं, मवेशियों को खुले में न छोड़ें और किसी भी संदिग्ध वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
वन्यजीव कॉरिडोर होने से बनी रहती है आवाजाही की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र इंद्रावती टाइगर रिजर्व (Indravati Tiger Reserve) और ओडिशा के वन क्षेत्रों से जुड़े वन्यजीव कॉरिडोर (Wildlife Corridor) का हिस्सा है। ऐसे क्षेत्रों में बाघ, तेंदुए सहित अन्य बड़े वन्यजीवों की आवाजाही की संभावना बनी रहती है। वन विभाग का कहना है कि कैमरा ट्रैप और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हमलावर वन्यजीव की पहचान स्पष्ट हो सकेगी। तब तक कैका-चेरबहार वन्यजीव हमला (Kaika Cherbahar Wildlife Attack) को लेकर किसी भी तरह की अटकलों से बचने की अपील की गई है।



