सीजी भास्कर, 05 जुलाई। राजधानी रायपुर में आयोजित एक चिकित्सा संवाद के दौरान देश और विदेश के हृदय रोग विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले वर्षों में हृदय रोगों के इलाज में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक तकनीक, नई दवाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपचार को अधिक प्रभावी बनाएंगे, लेकिन डॉक्टरों की भूमिका का विकल्प नहीं बनेंगे। (Heart attack risk in youth)
विशेषज्ञों ने बताया कि युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के पीछे धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और पारिवारिक इतिहास के अलावा वायु प्रदूषण, मिलावटी भोजन, तनाव और खराब नींद जैसी जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं भी प्रमुख कारण हैं। उनका मानना है कि इन जोखिमों को कम करने के लिए बचपन से ही स्वास्थ्य और नैतिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
हृदय रोग विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवन के लिए ‘8-8-8’ फॉर्मूला अपनाने की सलाह दी। इसके तहत 24 घंटे में 8 घंटे काम, 8 घंटे पर्याप्त नींद और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के लिए तथा 8 घंटे परिवार और व्यक्तिगत जीवन के लिए समय देने की बात कही गई। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक तनाव (Heart attack risk in youth) कम होता है, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है।
चिकित्सकों ने बताया कि भविष्य में ऐसी दवाओं के विकसित होने की संभावना है जो धमनियों में मौजूद ब्लॉकेज को बिना बड़ी सर्जरी के दूर करने में सक्षम होंगी। साथ ही कैथेटर आधारित उपचार और रोबोटिक तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा, जिससे ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता कम हो सकती है। एआई का उपयोग एक्स-रे, ईसीजी और अन्य जांचों के विश्लेषण में डॉक्टरों की सहायता के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों ने 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज की जांच कराने, एरोबिक व्यायाम करने, संतुलित आहार लेने और तनाव नियंत्रित रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोविड वैक्सीन से हार्ट अटैक बढ़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और लोगों को अपुष्ट दावों के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए।



