सीजी भास्कर, 09 जुलाई : बार-बार बिजली कटौती (Power Cut Case) और बारिश के दौरान चरमराई बिजली व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल कागजों पर एक्शन प्लान (Action Plan) बनाना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए और उनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग और नगर निगम को प्रगति रिपोर्ट के साथ अगली सुनवाई में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
बारिश के बाद बिजली संकट पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
मामला बिलासपुर में हाल ही में हुई तेज बारिश और आंधी-तूफान के बाद घंटों तक बिजली गुल रहने से जुड़ा है। शहर के कई इलाकों के साथ-साथ वीवीआईपी क्षेत्र कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन में भी पूरी रात बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। इससे पहले भी खराब मौसम के दौरान बिजली विभाग की लचर व्यवस्था लगातार सामने आती रही है।
मीडिया में प्रकाशित खबरों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने पहले ही ऊर्जा सचिव और सीएसपीडीसीएल (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक को शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने कोर्ट को बताया- तैयार किया गया है एक्शन प्लान
बुधवार को सुनवाई के दौरान ऊर्जा सचिव और सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक ने हाईकोर्ट को बताया कि बिलासपुर की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य स्तर पर बैठक कर नौ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
सरकार ने बताया कि अब शहर में क्षतिग्रस्त सीमेंट पोल की जगह केवल लोहे के बिजली खंभे लगाए जाएंगे, ताकि आंधी और तेज हवा के दौरान नुकसान कम हो। इसके अलावा उपभोक्ताओं की समस्याओं का तेजी से समाधान करने और बढ़ते लोड को कम करने के लिए मंगला और कोनी नाम से दो नए सप्लाई जोन बनाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण एवं सामान्य विकास योजना के तहत 10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस राशि से बार-बार फाल्ट वाले क्षेत्रों में खुले बिजली तारों को हटाकर कवर्ड केबल बिछाई जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित और निर्बाध हो सके।
नए सब-स्टेशन और अतिरिक्त संसाधनों की तैयारी
सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि शहर में बढ़ते बिजली लोड को देखते हुए एक नए ग्रिड सब-स्टेशन तथा दो नए 33/11 केवी सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए जिला प्रशासन से भूमि की मांग की गई है।
बारिश के दौरान पेड़ गिरने और फाल्ट की स्थिति से तुरंत निपटने के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही तकनीकी कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए नई भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
नगर निगम ने भी पेश किया अपना पक्ष
नगर निगम आयुक्त ने शपथपत्र में बताया कि मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, जहां अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है।
निगम के अनुसार जलभराव रोकने और नालियों की सफाई के लिए 14 विशेष वाहन 24 घंटे तैनात हैं। अप्रैल 2026 से शहर के सभी आठ जोनों में नालियों की सफाई और गाद निकालने का अभियान चलाया जा रहा है। इसकी जियो-टैग्ड तस्वीरें भी हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई हैं।
हाईकोर्ट की दो टूक- जनता को राहत मिलनी चाहिए
सरकारी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल योजनाएं बनाने या दावे करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रस्तावित सभी उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को वास्तविक राहत मिल सके।
डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि मानसून के दौरान शहर की सड़कों और गलियों में अनावश्यक जलभराव नहीं होना चाहिए तथा बिजली आपूर्ति भी निर्बाध बनी रहनी चाहिए। यदि कहीं से शिकायत मिलती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए।
कोर्ट ने ऊर्जा सचिव और नगर निगम आयुक्त को शपथपत्र के साथ विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट (Progress Report) पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई है।



