सीजी भास्कर, 09 जुलाई : सर्पदंश (Snake Bite) की अलग-अलग घटनाओं में कोबरा, करैत और रसेल वाइपर के डंस से पांच मासूमों की हालत गंभीर हो गई। सभी बच्चों को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां समय पर इलाज और विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी जान बचा ली गई। मेडिकल कॉलेज (Raigarh Medical College) में कई घंटे तक चले गहन उपचार के बाद सभी बच्चों को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। इस घटना ने रायगढ़ समाचार (Raigarh News) में बारिश के मौसम में बढ़ते सर्पदंश के खतरे को फिर सामने ला दिया है।
जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ निवासी दो सगे भाई वीर कुमार (7) और लाकेश राठिया (12) को रात में सोते समय करैत ने गर्दन पर डंस लिया। सुबह तक दोनों के शरीर में जहर फैल चुका था और उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी।
इसी तरह सक्ती जिले के हसौद निवासी मंजू (7) को कोबरा ने पैर में काट लिया, जिससे पैर में तेज सूजन और फफोले पड़ गए। रायगढ़ निवासी हितेश ढंगर (5) को रसेल वाइपर ने डंस लिया, जिसके कारण शरीर में रक्तस्राव और खून के थक्के बनने की गंभीर समस्या शुरू हो गई। वहीं कलमी निवासी हर्षित प्रजापति (7) को भी सोते समय करैत ने काट लिया था।
तीन बच्चों को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा
अस्पताल पहुंचने पर अधिकांश बच्चों में पलकें झुकना, बोलने और निगलने में कठिनाई, मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए। इनमें से तीन बच्चों को तत्काल पीआईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
रसेल वाइपर के दंश से पीड़ित बच्चे का रक्तस्राव और ब्लड क्लॉटिंग संबंधी जटिलताओं का भी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक उपचार किया।
50 वायल तक एंटी स्नेक वेनम देकर बचाई जान
डॉक्टरों ने मरीजों की स्थिति के अनुसार 50 वायल तक एंटी स्नेक वेनम दिया। इसके साथ आधुनिक गहन चिकित्सा, 24 घंटे लगातार निगरानी और आवश्यक जांच की गई। इलाज का असर हुआ और सभी पांचों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गए।
समय पर इलाज बना जीवन रक्षक
अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने बताया कि समय पर एंटी स्नेक वेनम, वेंटिलेटर सुविधा और प्रशिक्षित मेडिकल टीम की उपलब्धता के कारण सभी बच्चों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि सभी दवाएं और उपचार आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपलब्ध कराए गए।
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि यह सफलता अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक पीआईसीयू सुविधाओं का परिणाम है। बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी के नेतृत्व में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार निगरानी और समन्वित उपचार से पांचों बच्चों को नया जीवन दिया।



