सीजी भास्कर, 10 जुलाई। अमेरिका द्वारा ईरान के रणनीतिक चाबहार पोर्ट के आसपास की गई सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस घटनाक्रम ने भारत की महत्वपूर्ण विदेशी रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल चाबहार बंदरगाह को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास और संचालन में बड़ा निवेश किया है और इसे मध्य एशिया तथा अफगानिस्तान तक पहुंच के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता है। (Chabahar Port India Iran Crisis)
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कार्रवाई के बाद चाबहार क्षेत्र में कई धमाकों और बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने उन समुद्री ढांचों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल ईरान कथित रूप से अंतरराष्ट्रीय जहाजों के खिलाफ कर रहा था। वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।
भारत के लिए चाबहार पोर्ट (Chabahar Port India Iran Crisis) रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है। यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी अहम हिस्सा है, जिससे भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
चाबहार बंदरगाह को चीन समर्थित पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के रणनीतिक संतुलन के रूप में भी देखा जाता है। अरब सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के निकट स्थित यह बंदरगाह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करता है। हाल ही में भारत और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) इस बंदरगाह के एक टर्मिनल का संचालन कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चाबहार और उसके आसपास सैन्य तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर भारत के व्यापारिक मार्गों, ऊर्जा सुरक्षा, मध्य एशिया से कनेक्टिविटी योजनाओं और वहां चल रही भारतीय परियोजनाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत की नजर अब क्षेत्र के बदलते हालात और चाबहार पोर्ट की सुरक्षा पर बनी हुई है।



