सीजी भास्कर, 10 जुलाई : कोल लेवी घोटाला (Coal Levy Scam) मामले में गिरफ्तार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने स्पेशल कोर्ट में कई गंभीर दावे किए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित तौर पर करीब 800 करोड़ रुपये पार्टी फंड के नाम पर जुटाए गए और इस पूरी राशि की एंट्री तथा प्रबंधन रामगोपाल अग्रवाल के जरिए किया जाता था। EOW का दावा है कि यह रकम बोरी और कार्टन में भरकर कांग्रेस भवन लाई जाती थी, जहां से हवाला नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली भेजी जाती थी। हालांकि, इन आरोपों पर न्यायालय का अंतिम फैसला आना बाकी है और मामले की जांच जारी है।
EOW का दावा- कांग्रेस भवन पहुंचती थी कथित घोटाले की रकम
जांच एजेंसी द्वारा कोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार, कांग्रेस के अकाउंटेंट और रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक देवेंद्र डड़सेना ने अपने बयान में कहा है कि कथित कोल लेवी से प्राप्त राशि कांग्रेस भवन लाई जाती थी। इसके बाद उस रकम का नियंत्रण और प्रबंधन रामगोपाल अग्रवाल के पास रहता था। EOW का दावा है कि कोल लेवी से 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपये सीधे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचे, जिनके संग्रहण, प्रबंधन और उपयोग में उनकी भूमिका रही।
कारोबारियों के बयान का भी हवाला
EOW के मुताबिक, भिलाई के कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने अपने बयान में कहा कि दीपेन चावड़ा के माध्यम से करीब 800 करोड़ रुपये कांग्रेस भवन भेजे गए थे। वहीं निखिल चंद्राकर ने भी अपने बयान में कथित तौर पर कोल लेवी की राशि रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की बात कही है। जांच एजेंसी इन बयानों के आधार पर पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है।
8 राज्यों में रहा, धार्मिक स्थलों पर भी गया
शुरुआती पूछताछ में रामगोपाल अग्रवाल ने जांच एजेंसी को बताया कि रायपुर छोड़ने के बाद वह ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली समेत आठ राज्यों में रहे। इस दौरान उन्होंने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए और विशेष पूजा भी कराई। EOW का कहना है कि फरारी के दौरान भी वह परिवार, कुछ नेताओं और कारोबारियों के संपर्क में बने रहे।
Coal Levy Scam आयकर छापे से शुरू हुई जांच
EOW के अनुसार, 30 जून 2022 को कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और उसके कथित सिंडिकेट पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान बरामद डायरी और दस्तावेजों से अवैध कोल लेवी के लेन-देन का खुलासा हुआ था। इन्हीं दस्तावेजों में रामगोपाल अग्रवाल का नाम सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में 8 जुलाई 2026 को रामगोपाल अग्रवाल ने सरेंडर किया और 9 जुलाई को उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।
17 जुलाई तक रिमांड, अन्य मामलों में भी बढ़ सकती है कार्रवाई
EOW ने कोर्ट से 14 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन स्पेशल कोर्ट ने 9 दिन की रिमांड मंजूर करते हुए उन्हें 17 जुलाई तक EOW की हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर कस्टम मिलिंग, डीएमएफ और शराब घोटाले से जुड़े मामलों में भी आगे कार्रवाई की जा सकती है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मामले में अलग से जांच आगे बढ़ा रहा है।



