सीजी भास्कर, 11 जुलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई में राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले नौ दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन (Guest Teachers Protest) पर डटे हुए हैं। गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में संविलियन और समायोजन को लेकर कोई निर्णय नहीं होने से आंदोलनकारी शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई। विरोध स्वरूप अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की। आंदोलन के दौरान कई शिक्षक अपनी पीड़ा बताते हुए भावुक हो गए और तहसीलदार के सामने रो पड़े।
राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक शामिल हैं। आंदोलन के नौवें दिन सभी शिक्षकों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों से अवगत कराया। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले करीब दस वर्षों से सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न तो सेवा सुरक्षा मिली और न ही सम्मानजनक वेतन।
खून से लिखा पत्र, कहा- वादा पूरा नहीं कर सकते तो इच्छामृत्यु दे दें
आंदोलनकारी शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि यदि सरकार वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित नहीं कर सकती और संविलियन का वादा पूरा नहीं कर सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार की धमकी नहीं, बल्कि लंबे समय से उपेक्षा और असुरक्षा के कारण उपजी उनकी पीड़ा का प्रतीक है।
शिक्षा मंत्री पर अनदेखी का आरोप
राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज यादव ने आरोप लगाया कि वे अपनी मांगों को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर फैसला लेने का आग्रह किया था, ताकि आंदोलन समाप्त किया जा सके। लेकिन उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी गई और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। इसके बाद मजबूर होकर शिक्षकों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया।
चुनावी वादे पूरे करने की मांग
आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव (Guest Teachers Protest) के दौरान सरकार और जनप्रतिनिधियों ने संविलियन एवं समायोजन का आश्वासन दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि हालिया कैबिनेट बैठक में इस दिशा में कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से हजारों अतिथि शिक्षकों की उम्मीदें टूट गई हैं। उन्होंने सरकार से चुनावी वादे और “मोदी की गारंटी” के अनुरूप जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
समान कार्य, लेकिन नहीं मिल रहा समान वेतन
धरना स्थल (Guest Teachers Protest) पर मौजूद शिक्षकों ने कहा कि वे नियमित शिक्षकों की तरह ही स्कूलों में शिक्षण कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें काफी कम मानदेय दिया जाता है। इससे उनके परिवार आर्थिक संकट, सामाजिक कठिनाइयों और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों ने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और संविलियन अथवा समायोजन की मांग करते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की है।



